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दिल्ली ब्लैक स्पॉट: सड़क हादसों में मौतों का सिलसिला जारी, सुधार के प्रयास नाकाफी

By Dec 25, 2025

राजधानी दिल्ली में सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों पर लगाम नहीं लग पा रही है। लापरवाही से वाहन चलाना और जगह-जगह बने ब्लैक स्पॉट लोगों की मौत का मुख्य कारण बन रहे हैं। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस विभाग विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर इन घातक ब्लैक स्पॉट को खत्म करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन उनके प्रयास अब तक नाकाम साबित हो रहे हैं।

इस वर्ष 30 नवंबर तक 1,402 सड़क हादसों में 1,445 लोगों की मौत हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है। यह स्थिति तब है जब ट्रैफिक पुलिस ने चयनित ब्लैक स्पॉट में से कई को ठीक कर दिया है। इसके बावजूद, 111 घातक ब्लैक स्पॉट अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं, जिनमें आजादपुर सब्जी मंडी, वजीराबाद और अक्षरधाम मंदिर जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दुर्घटना विश्लेषण और सड़क अवसंरचना में सुधार के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है। क्रैश रिसर्च सेल उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान करता है, जहां रोड इंजीनियरिंग सेल सुरक्षा सुधारों की सिफारिश करता है। इस वर्ष 143 ब्लैक स्पॉट पर बेहतर सड़क डिजाइन, साइन बोर्ड लगाने और मरम्मत का सुझाव दिया गया है, ताकि सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए यात्रा सुरक्षित हो सके।

सड़क हादसों में कमी लाने के लिए, ट्रैफिक पुलिस ने स्कूल, कॉलेज और अस्पताल के आसपास 30 से अधिक स्थानों पर स्पीड कंट्रोल के उपाय किए हैं। इसके अलावा, 3,600 से अधिक कर्मियों को नवीन तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया गया है। दुर्घटना रिसर्च टीम को उच्च जोखिम वाले मार्गों को मैप करने का भी प्रशिक्षण मिला है।

किसी सड़क के 500 मीटर के हिस्से में सालभर में कम से कम पांच हादसे (जिनमें तीन घातक हों) होने पर उसे ‘ब्लैक स्पॉट’ माना जाता है। इस आधार पर सराय काले खां, राजोकरी फ्लाईओवर और आश्रम चौक जैसे क्षेत्र सबसे अधिक खतरनाक बताए गए हैं।

सर्दियों के मौसम में घना कोहरा सड़क हादसों का एक प्रमुख कारण बनता है। कोहरे में हादसों की मुख्य वजहों में कामचलाऊ गाड़ियों का इस्तेमाल, भूसा और गन्ने से लदे वाहन, कंस्ट्रक्शन मटीरियल से लदे डंपर, खराब फिटनेस वाली गाड़ियां, टेललाइट की कमी और ओवरलोडिंग शामिल हैं। ये वाहन कोहरे में अचानक ‘ब्लैक स्पॉट’ बनकर हादसे का कारण बनते हैं।

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