देहरादून murder case: त्रिपुरा के छात्र की हत्या पर पिता का आरोप, ‘पुलिस ने FIR दर्ज करने से मना किया’
देहरादून में एक क्रूर हमले में मारे गए त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के पिता तरुण प्रसाद चकमा ने उत्तराखंड पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने शुरू में उनके बेटे पर हुए हमले को एक ‘मामूली मामला’ बताकर FIR दर्ज करने से मना कर दिया था। पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने केवल तभी कार्रवाई की जब परिवार ने हस्तक्षेप किया।
उत्तराखंड में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे एंजेल चकमा की 17 दिनों के इलाज के बाद मौत हो गई थी। इस घटना ने त्रिपुरा और छात्र समूहों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। पिता ने बताया कि FIR दर्ज करने में हुई देरी ने उनके परिवार के सदमे को और बढ़ा दिया, जबकि उनका बेटा जीवन के लिए संघर्ष कर रहा था।
नस्लीय टिप्पणी के बाद हुआ हमला
तरुण प्रसाद चकमा ने बताया कि उन्हें देर रात छोटे बेटे का फोन आया, जिसने देहरादून में एंजेल पर हुए हमले की जानकारी दी। वह तुरंत छुट्टी लेकर उत्तराखंड पहुंचे। उन्होंने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंचे तो उनके बेटे की हालत गंभीर थी। एंजेल को पीठ में दो बार चाकू मारा गया था, जिससे उसका बायां हाथ और पैर लकवाग्रस्त हो गया था।
पिता के अनुसार, हमलावरों ने उनके बेटों को “चीनी” कहकर नस्लीय टिप्पणी की थी। जब एंजेल ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि वे भारतीय हैं, तो हिंसा बढ़ गई। सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के बाद पुलिस ने पाया कि तीन लोग मोटरसाइकिल पर आए थे और उन्होंने एंजेल के छोटे भाई पर हमला किया। जब एंजेल उसे बचाने आया, तो हमलावरों ने उसे पीठ में चाकू मार दिया।
मुख्यमंत्री ने दिया न्याय का आश्वासन
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एंजेल चकमा की हत्या को “अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय का आश्वासन दिया। धामी ने कहा कि उन्होंने मृतक के पिता से बात की है और उन्हें भरोसा दिलाया है कि सभी हत्यारों को जल्द गिरफ्तार कर न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि छह आरोपियों में से पांच को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पूर्वोत्तर के छात्रों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य इस दर्दनाक मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।
तरुण प्रसाद चकमा ने नस्लीय दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की और कहा कि भारत जैसे विविध देश में ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ बेटे के लिए न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो।
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