दिवाली 2025: वृष-सिंह लग्न का महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
साल 2025 की दीपावली सोमवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ मानी जा रही है। इस वर्ष स्थिर वृष लग्न और सिंह लग्न के शुभ संयोग से यह दीपोत्सव दीर्घकालिक फल और स्थाई सुख-समृद्धि प्रदान करेगा। यह पावन पर्व कार्तिक अमावस्या के शुभ अवसर पर पड़ रहा है, जो धन, समृद्धि और आध्यात्मिक जागरण की प्रतिध्वनि लेकर आ रहा है।
दीपावली के दिन सुबह स्नान के बाद भक्तों को श्री हनुमानजी का ध्यान करना चाहिए। शाम को घर के मुख्य द्वार पर शंख, स्वस्तिक और पदचिह्न अंकित कर स्थिर वृष लग्न में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाएगी। वृष लग्न का शुभ मुहूर्त सायं 7:10 बजे से रात्रि 9:06 बजे तक रहेगा। इस दौरान की गई पूजा स्थाई समृद्धि प्रदान करने वाली होगी। इसके उपरांत, अर्धरात्रि में सिंह लग्न (रात 2:34 बजे से भोर 4:05 बजे तक) में मां काली की साधना का विधान है। घर के सभी द्वारों पर दीप जलाने के साथ ही, पूर्व और उत्तर दिशा में विशेष दीप अवश्य रखने चाहिए।
बिहार के भागलपुर में, जिसे ‘अंग की पावन धरती’ के नाम से जाना जाता है, यह दीपोत्सव आध्यात्मिक समागम का साक्षी बनेगा। यहां सोमवार को कालरात्रि पर्व पर तीनों महाशक्तियों मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की एक साथ पूजा-अर्चना होगी। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सदियों से इस मिट्टी में बसे विश्वास और साधना का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों में भी यहां शक्ति आराधना के प्रमाण मिलते हैं। शहर के मंदिरों से लेकर घरों तक, दीपावली और काली पूजा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
बूढ़ानाथ मशानी काली, जोगसर, परबत्ती की काली मां, कालीबाड़ी, दुर्गाबाड़ी, हड़बड़िया काली, मंदरोजा जैसे करीब 77 स्थानों पर मां काली की विशेष आराधना की जाएगी। वहीं, संस्थानों और घरों में मां लक्ष्मी, विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती के साथ भगवान गणेश और भगवान कुबेर का आह्वान किया जाएगा। दीपावली पर पारंपरिक रूप से बही-खाता की पूजा भी श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है।
बूढ़ानाथ मंदिर के पंडित ऋषि केश पांडे बताते हैं कि कार्तिक अमावस्या की यह रात शास्त्रों में ‘कालरात्रि’ कही गई है। यह वह रात्रि है जब देवी काली प्रकट होकर अंधकार और नकारात्मक शक्तियों का विनाश करती हैं। इसी रात मां लक्ष्मी धन-संपदा प्रदान करती हैं और मां सरस्वती ज्ञान का आशीष देती हैं। भगवान गणेश और कुबेर की पूजा कर समृद्धि का वरदान प्राप्त किया जाता है। तंत्र और वेद परंपरा में कालरात्रि को चार महारात्रियों में प्रथम बताया गया है, जिनमें महारात्रि, मोहरात्रि और दारुण रात्रि भी शामिल हैं। आधुनिक जीवन में, ये रात्रियां केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानसिक शांति, सुरक्षा और नकारात्मकता से मुक्ति प्रदान करने वाली विशेष सिद्धिदायिनी मानी जाती हैं। इस वर्ष का यह पर्व जनमानस को स्थाई सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भागलपुर: धार्मिक पोस्टर फाड़ने पर बवाल, दो समुदाय आमने-सामने; पुलिस बल तैनात
बिहार चुनाव: राजद ने जारी की 143 उम्मीदवारों की सूची, भागलपुर पर विशेष फोकस
बिहार चुनाव: बागियों के तेवर से बिगड़ा सियासी खेल, प्रमुख दल झेल रहे भितरघात
भागलपुर में 25 हजार से अधिक वोटरों ने दबाया नोटा का बटन, मजबूत संदेश
भागलपुर विधानसभा: नौ महिला प्रत्याशियों ने लड़ी जंग, एक भी नहीं जीत पाईं
