दिल्ली की जहरीली हवा का नया दुश्मन धूल: 6 मंजिला इमारतों में एंटी-स्मॉग गन अनिवार्य
दिल्ली की हवा में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में अब धूल एक नया और गंभीर दुश्मन बनकर उभरी है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छह मंजिला या उससे अधिक ऊँची व्यावसायिक इमारतों में एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला खासकर उन निर्माण स्थलों और सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है, जो शहर की हवा को जहरीला बना रही हैं।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इस पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि उसने पहले से ही अपनी निर्माण स्थलों पर 82 एंटी-स्मॉग गन स्थापित कर ली हैं। DMRC ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि मेट्रो निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और यह उपाय अनिवार्य होने से काफी पहले ही इन गनों को लगाया जा चुका था।
हालांकि, यह मामला तब और गरमा गया जब कुछ दिन पहले दिल्ली नगर निगम ने महरौली-बदरपुर रोड पर स्थित DMRC की एक निर्माण साइट पर प्रदूषण नियंत्रण उपायों का पालन न करने के आरोप में DMRC पर 3.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। निगम के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशानिर्देशों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उचित अनुपालन नहीं किया जा रहा था। साइट पर धूल नियंत्रण की कमी, निर्माण सामग्री का खुला भंडारण, गलत बैरिकेडिंग और खराब हाउसकीपिंग जैसी कमियों को उजागर किया गया था।
DMRC ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि जिस साइट पर चालान काटा गया था, उसका केवल एक छोटा हिस्सा ही उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। इस घटना ने प्रदूषण नियंत्रण के प्रति विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और अनुपालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र लगातार गंभीर वायु प्रदूषण का सामना कर रहा है, जहाँ कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है। रोहिणी जैसे क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित पाए गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए, सरकार और विभिन्न एजेंसियां प्रदूषण को कम करने के लिए नए तरीके और तकनीकें अपनाने पर जोर दे रही हैं। दिल्ली सरकार ने हवा साफ करने के लिए 197 और धुआं नियंत्रण के लिए 68 प्रस्ताव प्राप्त किए हैं, जिनकी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा समीक्षा और परीक्षण शुरू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में 6 नए हाई-टेक वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे जो मौसम संबंधी जानकारी भी रिकॉर्ड करेंगे।
