डिजिटल शादी कार्ड के बहाने साइबर ठगों का नया खेल, बैंक खाते हो रहे खाली
शादी के सीजन के आते ही साइबर ठगों ने लोगों को ठगने का एक नया और खतरनाक तरीका ईजाद कर लिया है। हजारीबाग में आजकल व्हाट्सएप पर भेजे जा रहे डिजिटल शादी कार्ड के माध्यम से लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। पहले जहां निमंत्रण के लिए घर-घर जाकर कार्ड बांटे जाते थे, वहीं अब डिजिटल निमंत्रण का चलन बढ़ा है, जिसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं।
पिछले 20 दिनों में हजारीबाग में ऐसे 10 से अधिक मामले सामने आए हैं, जहां लोग इस साइबर जाल में फंसने से बाल-बाल बचे। इनमें शहर के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के पत्रकार भी शामिल हैं, जिन्हें उनके परिचित शादी घर संचालक के नाम से व्हाट्सएप पर एक डिजिटल निमंत्रण भेजा गया था। संदेश सामान्य लग रहा था, लेकिन जैसे ही उन्होंने ‘एपीके फाइल’ पर क्लिक किया, उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया।
जब फोन दोबारा चालू हुआ, तो पता चला कि यह एक नया साइबर फिशिंग टूल था। सौभाग्य से, जिस फोन में लिंक आया था, उसमें बैंक खाते से जुड़ा कोई भी ऑपरेशन नहीं होता था, अन्यथा ठग आसानी से पैसे निकाल लेते। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधी एपीके फाइल को डिजिटल शादी कार्ड का रूप देकर भेजते हैं। यह फाइल पीडीएफ या सामान्य लिंक की तरह दिखती है, लेकिन इसे खोलते ही मोबाइल फ्रीज या बंद हो जाता है। इसके बैकग्राउंड में एक हैकिंग स्क्रिप्ट इंस्टॉल हो जाती है, जो फोन की स्क्रीन दोबारा खुलने से पहले ही ठगों को आपके व्हाट्सएप, कॉन्टैक्ट्स, बैंकिंग ऐप्स और ओटीपी तक पहुंच प्रदान कर देती है।
इसी तरह के मामले हजारीबाग के केरेडारी स्थित पुरनी पेटो गांव, सदर प्रखंड के सिलवार के संजय कुमार मेहता और कटकमसांडी के लुपूंग के नरेश कुमार के साथ भी सामने आए हैं। केरेडारी के नारायण यादव के व्हाट्सएप को हैक कर साइबर ठगों ने उनके नाम से सैकड़ों लोगों और दर्जनों ग्रुपों में नकली शादी कार्ड भेज दिया। जिसने भी इस फाइल पर क्लिक किया, उनके मोबाइल लगभग आधे घंटे तक जाम रहे। जब लोगों ने नारायण यादव से इस शादी के बारे में पूछा, तब मामले का खुलासा हुआ कि न तो उनका कोई कार्यक्रम था और न ही उन्होंने कोई कार्ड भेजा था। यह साइबर ठगी की एक नई और भयावह शैली है।
साइबर विशेषज्ञ आम लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे किसी भी अनजान स्रोत से आए लिंक या एपीके फाइल पर क्लिक न करें। अपने मोबाइल में हमेशा एक अच्छा एंटीवायरस इंस्टॉल रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर सेल को दें, थाने को दें, या पुलिस को दें।
