डिजिटल अरेस्ट और ब्लैकमेल स्कैम से बचाव को पुलिस की जागरूकता कार्यशाला
साइबर अपराधों के बढ़ते जाल से आमजन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पुलिस लाइन स्थित ऑडिटोरियम में एक महत्वपूर्ण साइबर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विशेष रूप से युवाओं और आम नागरिकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘ब्लैकमेल’ जैसे नए तरह के ऑनलाइन स्कैम से बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यशाला का शुभारंभ एडीजी आगरा जोन, अनुपम कुलश्रेष्ठ द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर डीजीआई प्रभाकर चौधरी, डीएम कासगंज प्रणय सिंह, साइबर विशेषज्ञ अमित कुमार दुबे, एसपी अंकिता शर्मा, एसएसपी एटा, एसपी हाथरस और एएसपी ग्रामीण अलीगढ़ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अलीगढ़ रेंज के सभी जनपदों की साइबर सेल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअली जोड़ा गया, जिससे सभी पुलिसकर्मियों को एक साथ प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त हो सका।
इस कार्यशाला में न केवल पुलिसकर्मियों को साइबर सुरक्षा के गुर सिखाए गए, बल्कि विभिन्न कॉलेजों से आए शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं, प्राचार्यगण और उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह कदम साइबर अपराधों के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए, डीजीपी राजीव कृष्ण ने वर्चुअल माध्यम से राज्य में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुलिस बल की तकनीकी क्षमताओं को और सुदृढ़ करने तथा साइबर जागरूकता अभियानों का निरंतर विस्तार किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल आम नागरिक, बल्कि पुलिसकर्मी भी नवीनतम साइबर खतरों से अवगत होते हैं और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनते हैं।
विशेषज्ञों ने कार्यशाला में बताया कि कैसे अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग और मैलवेयर जैसी तकनीकों का उपयोग करके लोगों को निशाना बनाते हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में पीड़ितों को झूठे आरोपों में फंसाकर ब्लैकमेल किया जाता है, जबकि ब्लैकमेलिंग के अन्य रूपों में व्यक्तिगत जानकारी या आपत्तिजनक सामग्री का उपयोग कर पैसे ऐंठे जाते हैं। प्रतिभागियों को इन स्कैम की पहचान करने, उनसे बचने और यदि वे पीड़ित हो जाते हैं तो क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर महत्वपूर्ण सलाह दी गई। ऑनलाइन सुरक्षित रहने के लिए मजबूत पासवर्ड का उपयोग करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने जैसे सुझावों पर जोर दिया गया।
