करोड़ों खर्च, फिर भी बेकार! दरभंगा में पंचायत सरकार भवन बने ‘सफेद हाथी’, ग्रामीणों को 10 किमी दूर जाना मजबूरी
सरकार की मंशा थी कि पंचायत स्तर पर ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे सभी विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसी उद्देश्य से पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया गया, ताकि यह ग्रामीणों के लिए एक मिनी सचिवालय के रूप में कार्य करे। यहां जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आवास, पेंशन व कृषि योजनाओं से संबंधित जानकारी व आवेदन, शिकायत निवारण तथा कृषि, अंचल और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। बैंकिंग और डाकघर की सुविधा भी लोगों को मिल सके।
लेकिन, विडंबना यह है कि सरकारी व्यवस्थाओं की कमी के कारण पंचायत सरकार भवन आम लोगों के लिए सिर्फ एक भवन बनकर रह गया है। अधिकांश पंचायत सरकार भवनों में बने कमरे खाली पड़े हैं और ताले लटके रहते हैं। पंचायत सचिवों और अंचल कर्मियों को दो से तीन पंचायतों का प्रभार दिए जाने के कारण पंचायत सरकार भवनों पर उनकी उपस्थिति न के बराबर रहती है।
स्थिति यह है कि पंचायत में तैनात कार्यपालक सहायकों को आईडी और पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसके चलते न तो जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित कार्य हो पा रहा है और न ही पेंशन आवेदन या उसमें सुधार की प्रक्रिया पूरी हो पा रही है। मजबूरन ग्रामीणों को लगभग 10 किलोमीटर दूर प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।
प्रखंड क्षेत्र में प्रथम चरण में लगमा, पोखरभिंडा और कुर्सोमछैता पंचायतों में पंचायत सरकार भवन का निर्माण कराया गया था। वर्तमान में अन्य पंचायतों में भी निर्माण कार्य जारी है। वहीं सरकार की ओर से यह भी घोषणा की गई है कि पंचायत सरकार भवनों में डाकघर, बैंक और लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन यह योजना कितनी कारगर साबित होगी, यह भविष्य के गर्भ में है। पूर्व के पंचायत में बने पंचायत सरकार भवन की हालत भी जर्जर होती जा रही है। निर्माण के बाद आज तक मरम्मत के नाम पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं और भवन की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
