देश का पहला हाथी अस्पताल, दिल्ली से 180 किमी दूर, हाथियों की मस्ती और फलों की पार्टी
आगरा के फरह स्थित गढ़ी चुरमुरा में देश का पहला हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र (2010) और हाथी अस्पताल (2018) स्थापित है। दिल्ली से लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह केंद्र हाथियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जहाँ वे अपनी मस्ती और फलों की पार्टियों का आनंद लेते हैं।
हाथियों का मनोरंजन और देखभाल
केंद्र के निदेशक बैजू राज के अनुसार, यह भारत का पहला हाथी अस्पताल है, जो हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की भी विशेष देखभाल करता है। हाथियों के लिए अलग-अलग बाड़े बनाए गए हैं, जिनमें उनके घूमने-फिरने और नहाने के लिए पर्याप्त जगह है। प्रत्येक हाथी की व्यक्तिगत देखभाल के लिए एक महावत और एक सहायक कीपर तैनात है।
अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं
हाथी अस्पताल में चार डॉक्टर कार्यरत हैं और यह पोर्टेबल एक्सरे मशीन, लेजर मशीन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। हाथियों में पैरों की समस्याएं सबसे आम हैं, जिनका यहां प्रभावी ढंग से इलाज किया जाता है। यातना सह चुके और सर्कस से मुक्त कराए गए हाथियों को भी यहां आश्रय दिया जाता है। वाइल्ड एसओएस का सरकार के साथ करार है, जिसके तहत इन हाथियों का पुनर्वास किया जाता है।
खुला वातावरण और विशेष आयोजन
यहां हाथियों को बांधकर नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें बाड़ों में खुला छोड़ा जाता है और नियमित रूप से बाहर सैर के लिए भी ले जाया जाता है। 2018 में स्थापित इस अस्पताल में ट्रेन दुर्घटना में घायल एक हाथी का पहला इलाज किया गया था, जो अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अन्य हाथियों के साथ घुलमिल गया है।
केंद्र में हर हाथी के आगमन दिवस को उसके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सभी हाथियों को फलों की दावत दी जाती है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी इस आयोजन के लिए फंडिंग करती हैं। सुबह-शाम महावतों के साथ हाथियों की सैर का दृश्य बच्चों के लिए विशेष रोमांचक होता है।
