Times Square में ‘Jesus is Palestinian’ बिलबोर्ड पर विवाद, क्रिसमस के मौके पर छिड़ी नई बहस
न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में क्रिसमस के मौके पर एक डिजिटल बिलबोर्ड ने ‘Jesus is Palestinian’ (जीसस फिलिस्तीनी हैं) का संदेश प्रदर्शित करके एक नई बहस छेड़ दी है। यह बिलबोर्ड अमेरिकन-अरब एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कमेटी (ADC) द्वारा लगाया गया था, जिसने इसे फिलिस्तीनी पहचान के ‘मिटाए जाने’ के खिलाफ एक सांस्कृतिक प्रतिरोध बताया।
क्रिसमस के दौरान, जब टाइम्स स्क्वायर में लाखों पर्यटक मौजूद थे, यह संदेश एक अलग पैनल पर प्रदर्शित ‘MERRY CHRISTMAS’ की शुभकामनाओं के साथ दिखाई दिया। बिलबोर्ड पर हरे रंग की पृष्ठभूमि पर काले अक्षरों में लिखा यह संदेश, तुरंत ही सोशल मीडिया और मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
ADC ने अपने बयान में कहा कि यह बिलबोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष और जीसस के जन्मस्थान बेथलहम पर कब्जे के बीच फिलिस्तीनी विरासत को उजागर करने के लिए लगाया गया था। संगठन ने जीसस को बेथलहम में जन्मे फिलिस्तीनी शरणार्थी के रूप में वर्णित किया। इस अभियान का उद्देश्य क्रिसमस को उपभोक्तावाद से परे ले जाकर, फिलिस्तीनी पहचान और एकता को केंद्र में लाना था।
बिलबोर्ड को लेकर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। कुछ लोगों ने इसे ‘विभाजनकारी’ और ‘भड़काऊ’ बताया, खासकर क्रिसमस के समय में। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने इसे इतिहास, आस्था और पहचान पर विचार करने का निमंत्रण माना। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी बहस तेज हुई, जहां कुछ यूजर्स ने इसे ‘सुंदर और विचारोत्तेजक’ बताया, तो वहीं कुछ ने इसे ऐतिहासिक रूप से गलत करार दिया।
आलोचकों का तर्क था कि जीसस के समय में ‘फिलिस्तीन’ एक राजनीतिक इकाई के रूप में मौजूद नहीं था, और उन्हें ‘जुडियन’ (Judean) कहा जाना चाहिए। कुछ लोगों ने इसे ईसाइयों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी बताया।
ADC के राष्ट्रीय कार्यकारी निदेशक अदेब अयूब ने बिलबोर्ड का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य बहस शुरू करना था। उन्होंने कहा, “अगर लोग इस पर बहस करना चाहते हैं, तो यह बहुत अच्छा है। कम से कम आप बातचीत तो कर रहे हैं। वरना हमारी आवाज दबा दी जाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान का लक्ष्य अमेरिकी ईसाइयों और फिलिस्तीन के बीच साझा जड़ों को उजागर करना था, क्योंकि ईसाई धर्म का जन्मस्थान फिलिस्तीन है।
