यूपी सहायक बोरिंग टेक्नीशियन परीक्षा में नकल गिरोह का भंडाफोड़, 13 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश एसटीएफ को प्रतियोगी परीक्षाओं में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से नकल कराने वाले एक बड़े गिरोह को पकड़ने में बड़ी सफलता हाथ लगी है। यह गिरोह उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित लघु सिंचाई विभाग में सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा में सक्रिय था। एसटीएफ ने इस मामले में तीन अभ्यर्थियों सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से चार इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी बरामद हुई हैं, जिनका इस्तेमाल परीक्षा में नकल कराने के लिए किया जा रहा था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में प्रयागराज निवासी कप्तान सिंह पटेल, ओम प्रकाश पटेल, राकेश कुमार पटेल, धर्मेंद्र कुमार सिंह, लालता प्रसाद उर्फ गुड्डू, अनुज कुमार पाल, शिव प्रकाश पटेल, प्रतापगढ़ निवासी रविकांत वर्मा उर्फ अखिलेश, मनोज कुमार, विपिन कुमार वर्मा, धर्मेंद्र कुमार, चन्दर और दीपक पटेल शामिल हैं। इनमें से धर्मेंद्र कुमार, चन्दर और दीपक पटेल परीक्षा के अभ्यर्थी थे। यह गिरोह वाराणसी के एंग्लो इंडियन मुस्लिम इंटर कॉलेज और हरिश्चन्द्र बालिका इंटर कॉलेज के परीक्षा केंद्रों के साथ-साथ प्रयागराज के रामगढ़ कोठारी गांव में भी सक्रिय था। गिरोह के सरगना राजेन्द्र यादव उर्फ धीरेन्द्र यादव और शिवजीत पटेल मौके से फरार होने में सफल रहे, जिनकी तलाश जारी है।
एसटीएफ को गोपनीय सूचना मिली थी कि प्रयागराज में सक्रिय यह गिरोह भारी रकम लेकर माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल करवाता है। सूचना के आधार पर एसटीएफ ने जाल बिछाया और गिरोह के सरगना शिवजीत पटेल और उसके भाई कप्तान सिंह पटेल को साल्वरों के साथ रंगे हाथों पकड़ा। ये लोग वाराणसी के परीक्षा केंद्रों पर बैठे दो अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से प्रश्नपत्र हल करवा रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों में कप्तान सिंह पटेल, शिवजीत पटेल, दीपक पटेल और राजेंद्र पटेल पहले भी नकल के मामलों में पकड़े जा चुके हैं। यह गिरोह अपने रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों के माध्यम से परीक्षार्थियों से संपर्क साधता था और उन्हें अपने जाल में फंसाता था। परीक्षार्थियों के कपड़ों और कानों में छुपाए गए माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए साल्वरों की मदद से नकल कराई जाती थी।
गिरफ्तार अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि उसने कप्तान सिंह पटेल के खाते में 3.75 लाख रुपये और सवा लाख रुपये नकद ट्रांसफर किए थे। वहीं, एक अन्य गिरफ्तार अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा ने परीक्षा में नकल कराने के लिए पांच लाख रुपये नकद और 25 हजार रुपये का भुगतान किया था। परीक्षा के दौरान इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की व्यवस्था दीपक पटेल और राजेन्द्र यादव करते थे। परीक्षा शुरू होने के बाद प्रश्नपत्र की व्यवस्था राजेन्द्र यादव करता था, जिसे कप्तान सिंह पटेल और शिवजीत पटेल को भेजा जाता था। ये दोनों प्रयागराज में एक गुप्त स्थान पर साल्वरों को इकट्ठा कर उन्हें 20-20 हजार रुपये देकर नकल करवाते थे।
इस गिरोह का पर्दाफाश होने से परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने में मदद मिलेगी और भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
