प्रदूषण की चपेट में चंबल: यमुना सी मैली हुई नदी, जलीय जीवों पर मंडराया खतरा | chhattisgarh pollution news
कभी अपनी निर्मल जलधारा के लिए जानी जाने वाली चंबल नदी अब प्रदूषण की चपेट में आ गई है। नदी का पानी, जो पहले मिनरल वाटर को भी मात देता था, अब पीने योग्य नहीं रहा। पिछले कुछ महीनों से इसका रंग नीला से पीला हो गया है और किनारों से यमुना नदी की तरह दुर्गंध आ रही है।
पिनाहट और आसपास के कई गांवों के लोग आज भी पेयजल के लिए चंबल पर निर्भर हैं। कई गांव डार्क जोन में होने के कारण ग्रामीण कई किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं। पहले यह पानी सीधे पी लिया जाता था, लेकिन अब पानी के रंग और स्वाद में आए बदलाव के कारण लोग इसे इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि राजस्थान के धौलपुर से छोड़े जा रहे बड़े नालों का प्रदूषित पानी चंबल में मिलने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस प्रदूषण का सीधा असर नदी में रहने वाले जलीय जीवों पर पड़ रहा है। चंबल नदी को घड़ियाल और मगरमच्छों के लिए सेंचुरी क्षेत्र घोषित किया गया है, जहां खनन पर भी रोक है। लेकिन दूषित पानी इन जीवों के जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है, जिससे सरकार की जलीय जीव संरक्षण योजनाएं भी खतरे में पड़ सकती हैं।
