लखनऊ में ‘यूथ लीडरशिप’ पर मंथन, युवाओं के भविष्य पर हुई चर्चा
लखनऊ में युवा नेतृत्व और उनके भविष्य की दिशा पर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य युवा-केंद्रित विकास को समाज की मुख्यधारा में लाना था। ‘बेवजह और कॉमयूनिटी- द यूथ कलेक्टिव’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘सही और गलत से परे: युवा नेतृत्व बदल रहा है दुनिया की तस्वीर’ था। इसमें युवा नेताओं, अभिभावकों, शिक्षकों और विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया, जहां उन्होंने आज के युवाओं की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं पर गहन मंथन किया। यह संवाद युवाओं को सशक्त बनाने और उनके विचारों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘बेवजह पाठशाला, खरगापुर’ के बच्चों द्वारा प्रस्तुत एक लोककथा आधारित नाटक ‘सिंघ से डर’ से हुई। यह नाटक एक ऐसे राजा की कहानी थी जो अपनी सुंदरता और शक्ति पर गर्व करता था, लेकिन अपने सिर पर सींग होने के रहस्य को छिपाए रखता था। जब यह रहस्य अंततः उजागर होता है, तो राजा को डर लगता है कि उसका सम्मान समाप्त हो जाएगा। नाटक ने सत्य की स्वीकार्यता और दिखावे से परे वास्तविकता को समझने का संदेश दिया, जो युवा नेतृत्व के लिए भी प्रासंगिक है।
संवाद के दौरान मुख्य चर्चा का केंद्र यह था कि संस्थाएं और बड़े लोग युवाओं से क्या उम्मीदें रखते हैं, और इसके विपरीत युवा अपने माता-पिता, शिक्षकों तथा शैक्षणिक संस्थानों से क्या चाहते हैं। इस विचार-विमर्श और स्वस्थ बहस के बाद, दोनों पक्षों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हुए एक ‘साझा चार्टर ऑफ डिमांड्स’ तैयार किया गया। इस चार्टर में बदलते सामाजिक परिदृश्य में युवाओं की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें अधिक संवेदनशीलता से सुनने की अपील की गई है।
इस कार्यक्रम में पूर्व एससीईआरटी एवं बीएसए निदेशक सर्वेश विक्रम सिंह, नीरा, वरुण शंकर शुक्ला और रवि राज दयाल जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए। ऐसे संवाद कार्यक्रम युवाओं को अपनी बात रखने का मंच प्रदान करते हैं और समाज को उनके दृष्टिकोण से अवगत कराते हैं, जिससे एक समावेशी और प्रगतिशील भविष्य की नींव रखी जा सकती है।
