बिहार की ‘भखरा सिन्दूर’ रस्म: सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का अनोखा प्रतीक!
बिहार के मिथिलांचल और कई अन्य क्षेत्रों में विवाह संस्कार के दौरान निभाई जाने वाली ‘भखरा सिन्दूर’ की रस्म न केवल एक पारंपरिक विधान है, बल्कि यह नवविवाहित जोड़े के जीवन में सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक भी है। यह रस्म बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दिखाती है, जिसे सदियों से निभाया जा रहा है।
भखरा सिन्दूर बिहार, खासकर मिथिलांचल में विवाह की एक महत्वपूर्ण रस्म है। यह सिर्फ सिन्दूर का एक प्रकार नहीं है, बल्कि एक अनोखा विधान है, जो सिन्दूरदान की प्रक्रिया को और भी खास बना देता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में सिंदूरदान के लिए नारंगी और गुलाबी रंग के सिंदूर का उपयोग किया जाता है। इसे भखरा सिन्दूर कहा जाता है। यहां महिलाएं सभी शुभ अवसरों पर भखरा सिंदूर का इस्तेमाल करती हैं।
सिन्दूर के रंग के साथ-साथ, भखरा शब्द का मतलब इस रस्म के पात्र से भी जुड़ा हुआ है। इस रस्म में वर एक ऐसे पात्र से सिन्दूर लेता है, जिसमें बीच में एक छिद्र होता है। वर, इस पात्र के जरिए सिन्दूर को वधू की मांग में भरता है।
भखरा सिन्दूर की रस्म को बेहद पवित्र माना जाता है, जिसके पीछे कई धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं हैं।
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