UP MSME industries को बड़ी राहत, प्रदूषण नियंत्रण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी आसान
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और MSMEs को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और MSME मंत्री राकेश सचान ने एक उच्च स्तरीय बैठक में औद्योगिक भूखंड आवंटन और संचालन की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि MSMEs के लिए प्रदूषण नियंत्रण और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों पर अनावश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक भार को कम करना है। इसके अलावा, औद्योगिक भूखंड आवंटन से जुड़े अनावश्यक मुकदमों को न्यूनतम करने और आवंटित भूमि का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, लीज रेंट और रखरखाव शुल्क की उचित व्यवस्था, स्टार्टअप्स और पुरानी औद्योगिक इकाइयों को प्राथमिकता देने जैसे विषयों पर भी विचार किया। बैठक में बताया गया कि कई महत्वपूर्ण सुझावों को ‘निवेश मित्र 3.0’ के माध्यम से पहले ही लागू किया जा चुका है।
MSMEs को शीघ्र स्थापित करने की सुविधा देने के लिए, सरकार ने ‘सरदार वल्लभभाई पटेल योजना’ के तहत प्रत्येक जनपद में 100 एकड़ भूमि चिन्हित की है। इन क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर किया जाएगा, जिससे छोटे उद्योगों को कारोबार शुरू करने में आसानी होगी।
