यूपी पंचायत चुनाव से पहले कर्मचारियों को बड़ी राहत, वेतन रोकने पर जिला पंचायत अध्यक्षों को झटका
उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों की गहमागहमी के बीच, पंचायती राज विभाग ने अपने कर्मचारियों को एक बड़ी राहत दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिला पंचायत अध्यक्षों को किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का वेतन रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यह निर्णय लखनऊ और कौशांबी जिलों से प्राप्त गंभीर शिकायतों के बाद लिया गया है, जहां कर्मचारियों के वेतन रोके जाने की बात सामने आई थी।
प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग, अनिल कुमार तृतीय ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सेंट्रल ट्रांसफरेबल कैडर के कार्मिकों का नियुक्ति प्राधिकारी स्वयं राज्य सरकार है। इसलिए, जिला पंचायत अध्यक्षों को ऐसे कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगाने या दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। विभाग ने इसे ‘गलत परंपरा’ और ‘अमानवीय’ बताते हुए कहा कि बिना ठोस कानूनी आधार के वेतन रोकना अनुचित है और यह कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई गंभीर शिकायत है, तो जिला पंचायत अध्यक्ष साक्ष्यों के साथ उसे तत्काल शासन को भेजें। कार्रवाई का निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश भर के जिला पंचायत कार्यालयों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अक्सर राजनीतिक या व्यक्तिगत कारणों से उनके वेतन को निशाना बनाया जाता था।
इस प्रशासनिक कदम को आगामी पंचायत चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण सर्जरी के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक मशीनरी बिना किसी दबाव के सुचारू रूप से काम कर सके।
