इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, mritak ashrit नियुक्ति अस्थायी नहीं हो सकती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे के तहत दी जाने वाली सरकारी नौकरियों को लेकर एक कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ किया है कि अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली नियुक्तियां किसी भी स्थिति में अस्थायी नहीं हो सकती हैं, क्योंकि ये हमेशा स्वीकृत और नियमित पदों के विरुद्ध होती हैं। इस व्यवस्था से स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसी नौकरियों की सुरक्षा को लेकर कोई असमंजस नहीं होना चाहिए, जिससे पीड़ित परिवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
यह पूरा मामला आगरा निवासी सपना सारस्वत की याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत का ध्यान नियुक्ति पत्र की उस शर्त की ओर आकर्षित किया जिसमें नौकरी को पूरी तरह अस्थायी बताते हुए एक महीने के नोटिस पर समाप्त करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया था। इस आपत्ति पर संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने हैरानी जताई कि स्थापित कानूनी प्रावधानों के बावजूद ऐसी शर्तें नियुक्ति पत्रों में कैसे शामिल की जा रही हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष उपस्थित अपर महाधिवक्ता ने भी स्वीकार किया कि नियुक्ति पत्र में इस प्रकार की शर्त का उल्लेख करना पूरी तरह अनुचित और कानून के विपरीत है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि यह त्रुटि संभवतः विभिन्न विभागों में उपयोग किए जा रहे पुराने और एक समान प्रारूप के कारण हुई है।
राज्य सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि इस नीतिगत खामी को शासन स्तर पर तुरंत सुधारा जाएगा। साथ ही, भविष्य में किसी भी अनुकंपा नियुक्ति पत्र में ऐसी कोई शर्त नहीं जोड़ी जाएगी। अदालत ने शासन के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि नियमित पद होने के बावजूद ऐसी आपत्तिजनक शर्त क्यों जोड़ी गई थी। इसके साथ ही, संशोधित नियुक्ति पत्र भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
