भुवनेश्वर कुमार की चार साल बाद वापसी और भारतीय पेस अटैक की असलियत | india sports news
भारतीय क्रिकेट गलियारों में इस समय भुवनेश्वर कुमार की वापसी को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। करीब चार साल बाद राष्ट्रीय टीम में लौटे भुवनेश्वर न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में खेलते नजर आएंगे। उनका पिछला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला भी 2022 में इसी टीम के खिलाफ था। आईपीएल में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन और अपनी स्विंग गेंदबाजी के दम पर उन्होंने एक बार फिर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है।&xD;&xD;हालांकि, यह वापसी जितनी सुखद है, उतनी ही यह भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता भी पैदा करती है। जसप्रीत बुमराह को छोड़ दिया जाए, तो आज भारतीय टीम के पास ऐसा कोई गेंदबाज नहीं है जिसे तीनों फॉर्मेट में पूरी निरंतरता के साथ मैदान पर उतारा जा सके। मोहम्मद शमी की काबिलियत पर किसी को शक नहीं है, लेकिन उन्हें लगातार मौके न मिलना प्रबंधन की नीतियों पर सवालिया निशान लगाता है। वहीं, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा और मयंक यादव जैसे युवा गेंदबाजों ने प्रभावित जरूर किया है, लेकिन वे अभी तक वह स्थिरता नहीं दे पाए हैं जिसकी टीम को जरूरत होती है।&xD;&xD;इतिहास गवाह है कि भारत के पास हमेशा से विश्वस्तरीय बल्लेबाजों की फौज रही है, लेकिन मैच जिताऊ तेज गेंदबाजों का सूखा हमेशा से बना रहा है। जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और इशांत शर्मा जैसे गेंदबाजों ने शानदार सेवाएं दीं, लेकिन उनके जाने के बाद दूसरे छोर पर वैसा ही मजबूत विकल्प तैयार नहीं हो सका। भुवनेश्वर की यह वापसी चयनकर्ताओं की मजबूरी है या किसी खास जरूरत का हिस्सा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन यह टीम इंडिया के गेंदबाजी तंत्र की पोल जरूर खोल रही है।
