राष्ट्रीय राजधानी में ‘लौह पुरुष’ नाटक के साथ Bharat Rang Mahotsav का भव्य समापन
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) द्वारा आयोजित 25वें भारत रंग महोत्सव का नई दिल्ली में भव्य समापन हो गया। सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन पर आधारित नाटक ‘लौह पुरुष’ के मंचन के साथ इस विशाल सांस्कृतिक पर्व का पर्दा गिरा। यह महोत्सव भारतीय रंगमंच की विविधता और समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन था, जिसने देश भर के रंगमंच प्रेमियों और कलाकारों को एक मंच प्रदान किया।
समापन समारोह में पूर्व एनएसडी निदेशक प्रो. राम गोपाल बजाज, प्रसिद्ध गीतकार स्वानंद किरकिरे और अभिनेत्री मीता वशिष्ठ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। ‘लौह पुरुष’ नाटक ने स्वतंत्रता संग्राम में सरदार पटेल की भूमिका और एकीकृत भारत के निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान को जीवंत किया।
एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि रंगमंच एक समग्र कला है और 25वें Bharat Rang Mahotsav ने सभी विधाओं और शैलियों को सफलतापूर्वक समेटा है। उन्होंने बताया कि इस बार लद्दाख की कड़ाके की ठंड से लेकर अंटार्कटिका तक प्रस्तुतियां हुईं, जो महोत्सव की व्यापक पहुंच को दर्शाती हैं।
महोत्सव के दौरान 280 से अधिक शो और लगभग 250 पूर्ण लंबाई के नाटकों का मंचन किया गया। इसमें 36 स्ट्रीट प्ले, 16 एकांकी और 33 माइक्रो ड्रामा भी शामिल थे। आओ नागा, बृजवाली, बुंदेली, राभा, मैतेई, मैथिली, बलती, भाटी और गारो जैसी विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रस्तुतियां हुईं, जिससे देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन हुआ। लगभग 5 हजार कलाकारों, 1 हजार तकनीशियनों और 10 हजार से अधिक सहयोगी कर्मियों ने इस आयोजन में अपनी भूमिका निभाई। ‘जश्न-ए-बचपन’ में 1000 से अधिक बाल कलाकारों और ‘आदिरंग’ में 400 जनजातीय कलाकारों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, 33 महिला निर्देशकों के नाटकों का प्रदर्शन, 19 पुस्तक विमोचन और दया प्रकाश सिन्हा की स्मृति सभा भी आयोजित की गई।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कनाडा, स्पेन, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, कतर, मॉरीशस, सूरीनाम, तंजानिया और यूएई सहित कई देशों ने महोत्सव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। स्पेन ने मास्क मेकिंग पर एक विशेष कार्यशाला का भी आयोजन किया, जिससे कलाकारों को वैश्विक कला शैलियों से जुड़ने का अवसर मिला। इस अवसर पर एनएसडी की इंटरनेट रेडियो पहल ‘रेडियो आकाश’ की भी शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य रंगमंच से जुड़ी जानकारियों का व्यापक प्रसार करना है। यह महोत्सव देश भर के रंगमंच प्रेमियों और कलाकारों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना, जिसने भारतीय कला और संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
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