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भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने की योजना का जोरो संगठन ने किया कड़ा विरोध

By Nov 21, 2025

भारत-म्यांमार सीमा के मिजोरम खंड पर बाड़ लगाने की केंद्र सरकार की योजना को मिजोरम स्थित जो री यूनिफिकेशन आर्गेनाइजेशन (जोरो) ने अस्वीकार्य बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यह संगठन भारत, बांग्लादेश और म्यांमार की चिन, कुकी, मिजो और जोमी जनजातियों का प्रतिनिधित्व करता है। जोरो ने इस कदम को एक ही जातीय वंश के लोगों को विभाजित करने का प्रयास करार दिया है।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार और विभिन्न समूहों के कड़े विरोध के बाद कुछ समय के लिए रोकी गई बाड़ लगाने की योजना को केंद्र सरकार ने हाल ही में फिर से शुरू किया है। मिजोरम 510 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार के चिन राज्य के साथ साझा करता है। दोनों क्षेत्रों के मिजो और चिन लोगों के बीच गहरे जातीय संबंध हैं, जो इस सीमा पर बाड़ लगाने की योजना को संवेदनशील बनाते हैं।

जोरो के उपाध्यक्ष एल रामदिनलियाना रेंथलेई ने कहा, “हम इस योजना को अस्वीकार्य मानते हैं, क्योंकि यह एक ही वंश वाले लोगों को विभाजित करने का प्रयास है। हम कड़ा विरोध दोहराते हैं और घोषणा करते हैं कि सीमा पर बाड़ लगाने के निर्माण का विरोध करते रहेंगे।” उनका यह बयान इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और जनजातीय समुदायों की भावनाओं को दर्शाता है।

गौरतलब है कि भारत-म्यांमार की कुल 1643 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे सील करने की योजना पर सरकार काम कर रही है, जिसमें लगभग 31 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हाल के दिनों में, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता बढ़ी है, जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कहने से भी स्पष्ट होता है। हालाँकि, इस तरह की बाड़ लगाने की योजनाएं अक्सर सीमावर्ती समुदायों के बीच सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं, जैसा कि जोरो संगठन के विरोध से जाहिर होता है।

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