भारतीय तीरंदाजी के ‘द्रोणाचार्य’ एल मूर्ति का निधन, खेल जगत में शोक की लहर
जमशेदपुर से खेल जगत के लिए एक अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। भारतीय तीरंदाजी के जाने-माने और सम्मानित कोच एल मूर्ति का निधन हो गया है, जिससे पूरे खेल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने जमशेदपुर में अंतिम सांस ली। एल मूर्ति के निधन की खबर सुनते ही तीरंदाजी के खिलाड़ी, कोच और प्रशंसक स्तब्ध रह गए।
एल मूर्ति ने अपना पूरा जीवन भारतीय तीरंदाजी के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था। उन्हें तीरंदाजी के ‘द्रोणाचार्य’ के रूप में जाना जाता था, जिनके कुशल मार्गदर्शन में अनगिनत तीरंदाजों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को तराश कर उन्हें चैंपियन बनाया, जिन्होंने ओलंपिक, एशियाई खेल और विश्व चैंपियनशिप जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में देश के लिए पदक जीते। उनके प्रशिक्षण की बदौलत भारतीय तीरंदाजी ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई।
उनके निधन से न केवल तीरंदाजी समुदाय बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत को एक अपूरणीय क्षति हुई है। एल मूर्ति केवल एक कोच नहीं थे, बल्कि वे अपने शिष्यों के लिए एक मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और पिता समान थे। वे हमेशा मैदान पर सक्रिय रहते थे और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारने के लिए अथक प्रयास करते थे। सूत्रों के अनुसार, उनका जुनून और समर्पण ही था जिसने कई युवा तीरंदाजों को इस खेल को अपनाने और उसमें उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
खेल प्रेमियों और विभिन्न खेल संगठनों ने एल मूर्ति के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनके शिष्यों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि मूर्ति सर की सीटी की आवाज अब खामोश हो गई है, लेकिन उनकी शिक्षाएं और प्रेरणा हमेशा उनके साथ रहेगी। भारतीय तीरंदाजी में उनका योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बने रहेंगे।
