यूपी चुनाव से पहले स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी, क्या है भाजपा की तैयारी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्मृति ईरानी को एक बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया गया है, जिससे 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनकी नई भूमिका को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। भाजपा इस नियुक्ति के जरिए युवा पीढ़ी (Gen-Z) और महिला मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है।
स्मृति ईरानी, जो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ जैसे धारावाहिकों से घर-घर में लोकप्रिय हुईं, संसद में भी भाजपा की एक मुखर आवाज रही हैं। अमेठी में राहुल गांधी को हराने के बाद, उन्हें कांग्रेस के खिलाफ पार्टी का एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जा रहा है। हालिया मानसून सत्र में विपक्ष की मुखरता के बीच, भाजपा ने मिशन-2027 के लिए प्रियंका गांधी और डिंपल यादव जैसे चेहरों की काट के रूप में स्मृति ईरानी को उतारा है। सड़क से लेकर संसद तक, आधी आबादी के बीच एक मजबूत आवाज की कमी को पूरा करने में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी को घेरने के लिए भाजपा अक्सर स्मृति ईरानी की प्रतिभा का उपयोग करती रही है। हालांकि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की निवासी नहीं हैं, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्हें यूपी कोटे से यह महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई है। 2014 में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने और 2019 में जीत हासिल करने के बाद, स्मृति ईरानी को पार्टी का एक अहम चेहरा माना जाता है। 2024 में हार के बावजूद, उन्हें पार्टी के लिए एक मजबूत आवाज के रूप में देखा जा रहा है।
नई दिल्ली में जन्मीं स्मृति ईरानी राजनीति में आने से पहले एक प्रसिद्ध टेलीविजन अभिनेत्री थीं। उन्होंने 2003 में भाजपा की सदस्यता ली और विभिन्न संगठनात्मक पदों पर कार्य किया, जिसमें महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं। गुजरात से राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में प्रवेश करने के बाद, उन्होंने 2019 में अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीता और केंद्रीय मंत्री के रूप में विभिन्न मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।
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