बस्तर में गूंज रही ‘लाइट, कैमरा, एक्शन’ की आवाजें, विकास की नई कहानी
कभी माओवादी हिंसा की काली छाया तले दबे रहने वाला बस्तर अब एक नई सुबह देख रहा है। गोलियों की गूंज की जगह अब जंगलों में ‘लाइट, कैमरा, एक्शन’ की आवाजें सुनाई दे रही हैं। अबूझमाड़ से लेकर दक्षिण बस्तर तक, फिल्मकार इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और अनूठी संस्कृति को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं।
वर्तमान में ‘दण्डा कोटुम’ की शूटिंग जारी है, वहीं हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘माटी’ ने दर्शकों का ध्यान खींचा है। इसके अलावा ‘ढोलकल’, ‘आरजे बस्तर’ और मुंदरा मांझी जैसे विषयों पर आधारित फिल्में भी जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाली हैं। बस्तर की मनमोहक प्रकृति, घने जंगल, कल-कल बहती नदियां, झरने और पर्वतमालाएं, इन सबके साथ आदिवासी संस्कृति की जीवंत छटा फिल्म निर्माताओं को एक नया कैनवास प्रदान कर रही है।
छत्तीसगढ़ी फिल्मकार अमलेश नागेश का कहना है कि वे अबूझमाड़ की वास्तविक पहचान को दुनिया के सामने लाने के लिए ‘दण्डा कोटुम’ की शूटिंग के लिए इस स्थान को चुना है। उनके फिल्म यूनिट में लगभग 150 सदस्य हैं, जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकार और युवा शामिल हैं। गांव की महिलाएं फिल्म यूनिट के लिए भोजन तैयार कर रही हैं, और बच्चे सेट पर कलाकारों के साथ खेलते हुए नजर आते हैं। यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अनूठा अवसर है।
वरिष्ठ छायाकार सुभाष पांडे बताते हैं कि एक समय था जब देवानंद, नाना पाटेकर, मिथुन चक्रवर्ती जैसे दिग्गज कलाकार बस्तर आया करते थे। 1957 में स्वीडिश फिल्म ‘द जंगल सागा’ की शूटिंग अबूझमाड़ में हुई थी, जिसने चेंदरू मंडावी को ‘बस्तर का मोगली’ बना दिया था। लगभग चार दशक पहले, जब माओवाद का प्रभाव कम था, तब बस्तर में फिल्मों, धारावाहिकों और वृत्तचित्रों की शूटिंग नियमित रूप से होती थी। 1980 में आई फिल्म ‘कस्तूरी’ की शूटिंग भी बस्तर में ही हुई थी, जिसमें नूतन, मिथुन चक्रवर्ती जैसे बड़े कलाकार थे।
जैसे-जैसे बस्तर माओवादी हिंसा के साए से बाहर निकल रहा है, वैसे-वैसे फिल्मों की शूटिंग का पुराना सुनहरा दौर लौटता दिखाई दे रहा है। यह न केवल मनोरंजन का एक नया माध्यम है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रहा है। बस्तर अब अपनी वीर गाथाओं और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ एक नई रचनात्मक कहानी भी लिख रहा है।
