बहराइच के आठ जनजाति गांवों का होगा कायाकल्प, 15.91 करोड़ से चमकेगी तस्वीर
बहराइच जिले के मिहींपुरवा विकास खंड के आठ अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांवों की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है। इन गांवों के समग्र विकास के लिए 15 करोड़ 91 लाख रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना को शासन से हरी झंडी मिल गई है। इस योजना के क्रियान्वयन से इन गांवों में रहने वाले करीब 25 हजार थारू समुदाय के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।
नेपाल सीमा से सटे मिहींपुरवा ब्लॉक के विशुनपुर, बर्दिया, फकीरपुरी, रमवापुर, भैसाही, धर्मापुर, कोली मटेही और लौकाही जैसे गांवों में अनुसूचित जनजाति (थारू) के लोग निवास करते हैं। इन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव को देखते हुए, केंद्र और प्रदेश सरकार ने विशेष रूप से इस समुदाय के विकास के लिए एक अलग बजट का प्रावधान किया है।
समाज कल्याण विभाग ने जिलाधिकारी के माध्यम से इन गांवों के विकास के लिए 15 करोड़ 91 लाख 54 हजार रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। इस प्रस्ताव में गांवों में स्ट्रीट लाइटें लगाने, पक्की सीसी सड़कों का निर्माण, इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने, नालियों का निर्माण और सामुदायिक भवनों के विकास जैसे कार्यों को शामिल किया गया है। इन विकास कार्यों के पूरा होने से न केवल इन गांवों की सूरत बदलेगी, बल्कि थारू समुदाय के लोग भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
जिला समाज कल्याण अधिकारी के अनुसार, अनुसूचित जनजाति के आठ गांवों में विकास कार्यों के प्रस्ताव अक्टूबर माह में प्रमुख सचिव और भारत सरकार को भेजे गए थे। आवश्यक अनुमति प्राप्त होने के बाद विकास कार्य युद्धस्तर पर कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएँ उपलब्ध कराना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
यह भी उल्लेखनीय है कि इसी ब्लॉक के हरैया गांव में आश्रम पद्धति विद्यालय और बोझिया गांव में एकलव्य मॉडल इंटर कॉलेज संचालित हैं, जहां विशेष वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, रिसिया मोड़ के पास एक अन्य आश्रम पद्धति विद्यालय और शहर के समाज कल्याण कार्यालय परिसर में राजकीय इंटर कॉलेज भी इसी समुदाय के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। इन विकास पहलों से जनजाति समुदाय के शैक्षिक और सामाजिक उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
