पतंगबाजी के शौकीनों के लिए बुरी खबर! प्रतिबंधित मांझे पर एनजीटी सख्त, सरकार से मांगा जवाब
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रतिबंधित मांझे के इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया है। वाराणसी में बीते वर्ष 31 दिसंबर को एक दर्दनाक हादसा हुआ था, जब 24 वर्षीय विवेक शर्मा अपनी मां श्यामलता देवी के साथ बाइक से जा रहे थे। अचानक प्रतिबंधित मांझा गले में फंसने से विवेक की गर्दन कट गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
विवेक की मां श्यामलता देवी ने सरकार और पुलिस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए एनजीटी के समक्ष याचिका दायर की। याचिका में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री, खरीद, उपयोग एवं भंडारण पर लागू प्रतिबंध को प्रभावी बनाने और मुआवजे की मांग की गई थी। एनजीटी की प्रधान पीठ नई दिल्ली के न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ सदस्य डा. ए. सेंथिल वेल की दो सदस्यीय पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, वाराणसी के जिलाधिकारी व पुलिस आयुक्त को मुआवजे के संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में शपथपत्र देने का आदेश दिया।
वाराणसी पुलिस आयुक्त की तरफ से सहायक पुलिस आयुक्त, यातायात ने अधिकरण के समक्ष शपथ पत्र देकर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री व उपयोग पर रोक लगाने के संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बताया गया कि तीन व्यक्तियों के खिलाफ चाइनीज मांझे की बिक्री व भंडारण को लेकर मुकदमा दायर किया गया और उनकी गिरफ्तारी के साथ चार्जशीट भी दाखिल की गई। हालांकि, पुलिस ने बताया कि जिस चाइनीज मांझे से याचिकाकर्ता के पुत्र की मौत हुई थी, उसके उपयोगकर्ताओं को नहीं खोजा जा सका।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने भी शपथ पत्र दिया। बोर्ड ने बताया कि प्रतिबंधित मांझे की खरीदारी, उपयोग, बिक्री एवं भंडारण पर लगे प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से उठाए गए कदमों का ब्यौरा मांगा गया है। 22 राज्यों का जवाब आ चुका है, जबकि अन्य का जवाब आना बाकी है। एनजीटी ने सरकार के अधिवक्ता के अनुरोध पर अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तिथि निर्धारित की है।
