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बांका में 65 वाणिज्य शिक्षक बिना पढ़ाए दो साल से उठा रहे वेतन: पोस्टिंग में गड़बड़ी

By Dec 1, 2025

बांका जिले में बीपीएससी शिक्षक बहाली की तैनाती और स्थानांतरण प्रक्रिया में असमानता के कारण विद्यालयों में गंभीर खामियां उभर कर सामने आई हैं। विशेष रूप से हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में, जहां वाणिज्य संकाय के छात्रों की संख्या अधिक है, शिक्षकों की भारी कमी देखी जा रही है। इसके विपरीत, कई ऐसे विद्यालय हैं जहां वाणिज्य की पढ़ाई के लिए न तो आवश्यक कोड प्राप्त है और न ही कभी किसी छात्र ने इस संकाय में नामांकन लिया है, फिर भी वहां बड़ी संख्या में वाणिज्य शिक्षक तैनात हैं।

सूत्रों के अनुसार, जिले में बीपीएससी द्वारा नियुक्त 71 वाणिज्य शिक्षकों में से मात्र 7 शिक्षक ही सक्रिय रूप से छात्रों को पढ़ा रहे हैं। बाकी 65 शिक्षक उन विद्यालयों में पदस्थापित हैं जहां वाणिज्य की पढ़ाई की व्यवस्था ही नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि जिले के 90 प्रतिशत से अधिक वाणिज्य शिक्षक पिछले दो वर्षों से बिना किसी अध्यापन कार्य के वेतन उठा रहे हैं। यह स्थिति उन विद्यालयों के लिए चिंताजनक है जहां वाणिज्य के छात्र नामांकित हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

अधिकांश ऐसे शिक्षक नए उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में तैनात किए गए हैं, जिन्हें अभी तक वाणिज्य विषय में नामांकन और पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग से कोई कोड प्राप्त नहीं हुआ है। जिन तीन विद्यालयों में वाणिज्य संकाय में छात्रों का नामांकन है, वे हैं आरएमके, नवादा बाजार और कटोरिया उच्च विद्यालय। इन तीनों विद्यालयों में वाणिज्य के शिक्षकों की संख्या केवल एक से दो तक सीमित है, जबकि छात्रों की संख्या काफी अधिक है।

उदाहरण के तौर पर, उच्च विद्यालय जयपुर में वाणिज्य के तीन शिक्षक तैनात हैं, लेकिन आज तक वहां वाणिज्य में एक भी छात्र नामांकित नहीं हुआ है। इसी तरह, शहर के एमआरडी, एसएस बालिका और ककवारा उच्च विद्यालयों में वाणिज्य संकाय में कोई नामांकन नहीं है, फिर भी वहां शिक्षक मौजूद हैं। इसके विपरीत, आरएमके स्कूल जैसे संस्थानों में, जहां हर साल 120 से अधिक छात्र नामांकित होते हैं, पिछले 12 वर्षों से केवल एक ही वाणिज्य शिक्षक कार्यरत है।

यह विडंबना है कि शिक्षा विभाग ने किसी भी उत्क्रमित उच्च विद्यालय में वाणिज्य के पद स्वीकृत नहीं करने का आदेश जारी किया हुआ है, फिर भी जिले में अधिकांश शिक्षक ऐसे ही विद्यालयों में तैनात हैं। बिजनस स्टडी जैसे विषयों के शिक्षक, जैसे नौबहार साबिर, रंगोली कुमारी और राजेश कुमार, बताते हैं कि वे दो साल से विद्यालयों में हैं लेकिन उनके स्कूलों में वाणिज्य का एक भी छात्र नामांकित नहीं हुआ है। वे खाली कक्षाएं देखकर बच्चों को हिंदी या अंग्रेजी जैसे अन्य विषय पढ़ाने को मजबूर हैं।

इस मामले पर जब जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), बांका, देवनारायण पंडित से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि शिक्षकों की पोस्टिंग पटना से ऑनलाइन माध्यम से की गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि कई विद्यालयों में बिना बच्चों वाले विषयों में शिक्षकों की तैनाती हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्य मुख्यालय को अवगत करा दिया गया है और शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया अभी जारी है, जिसमें आगे सुधार करने का प्रयास किया जाएगा।

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