मार्को रुबियो के जामनगर दौरे से अमेरिका को ऊर्जा संकट से राहत की उम्मीद | international news
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया भारत दौरे के दौरान जामनगर स्थित रिफाइनरी का निरीक्षण वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ बढ़ाने और नए प्रतिबंध लगाने तक की कोशिश की, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया।&elementTypeH3भारत की रिफाइनिंग क्षमता बनी वैश्विक ताकत&elementTypeरिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल साइट रिफाइनरी है। भारत वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के रिफाइनिंग में शीर्ष देशों में शामिल है और दुनिया के 100 से अधिक देशों को पेट्रोल-डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों का निर्यात करता है। यूक्रेन युद्ध के बाद जब यूरोपीय देशों ने रूस से सीधे ऊर्जा आयात बंद किया, तब उन्होंने भी अपनी जरूरतों के लिए भारतीय रिफाइनरियों का रुख किया था।&elementTypeH3वेनेजुएला के तेल और अमेरिका की मजबूरी&elementTypeवर्तमान में अमेरिका को अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वेनेजुएला से मिलने वाले भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की आवश्यकता है। इस प्रकार के जटिल और भारी तेल को प्रोसेस करने की उन्नत तकनीक केवल चुनिंदा देशों के पास है, जिसमें जामनगर रिफाइनरी सबसे आगे है। इसी मजबूरी और भारत की वैश्विक महत्ता को समझते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ करार दिया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
