पूर्वांचल एक्सप्रेसवे हादसे के बाद UP में बसों की जांच तेज, यात्रियों की सुरक्षा पर सख्त निर्देश
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर एक गंभीर हादसे के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने अब अन्य राज्यों से यूपी में प्रवेश करने वाली बसों की जांच को तेज करने का फैसला किया है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि वाहनों की जांच में किसी भी प्रकार की ढिलाई पाई जाती है, या जिस क्षेत्र में यात्री वाहन से कोई दुर्घटना घटित होती है, वहां के संबंधित अधिकारियों को दंडित किया जाएगा।
हादसे का शिकार हुई बस के मामले में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि उसकी बॉडी कोड मानक के अनुरूप नहीं थी। आपातकालीन द्वार के सामने सीट लगाना बस बॉडी कोड का स्पष्ट उल्लंघन है, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी राज्यों की बसों की गहन जांच की जाएगी, जिसमें अनुमन्य संख्या से अधिक यात्री ले जाने या अन्य सुरक्षा मानकों का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब पता चलता है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर दुर्घटनाग्रस्त हुई बस का पांच साल में 73 बार चालान हो चुका था, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश में 43 चालान किए गए थे। इसके बावजूद, न तो बस का पंजीकरण निलंबित किया गया और न ही चालक का ड्राइविंग लाइसेंस। प्रदेश में ऐसे नियम हैं कि पांच या उससे अधिक बार चालान होने पर वाहन का पंजीकरण और ड्राइवर का लाइसेंस निलंबित किया जाना चाहिए। इस बस का पंजीकरण हरियाणा के गुरुग्राम में प्रदीप कुमार के नाम पर 14 मार्च 2019 को हुआ था। तब से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जयपुर, दिल्ली और बिहार में इसके 73 चालान मोटर व्हीकल एक्ट और सेल्स टैक्स के तहत किए गए। हैरानी की बात यह है कि इतने चालान और जुर्माने के बावजूद, किसी भी शहर के आरटीओ ने इस पर कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते यह बस लगातार चलती रही। लखनऊ आरटीओ क्षेत्र में ही इस बस का 27 बार चालान किया गया था। कुल 73 चालानों में 17,62,148 रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें बिहार के सुपौल में लगाया गया 2,29,500 रुपये का जुर्माना सबसे अधिक था।
