कानपुर में कोचिंग सेंटरों पर एक्शन जारी, 10 और सील, 20 चिह्नित
लखनऊ के गेमिंग जोन में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। इसी क्रम में कानपुर में भी सरकारी अमला हरकत में आ गया है। सोमवार शाम से शुरू हुआ छापेमारी अभियान मंगलवार को भी जारी रहा, जिसमें दोपहर तक 10 और कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया गया। इसके अलावा, 20 अन्य कोचिंग सेंटरों को कार्रवाई के लिए चिह्नित किया गया है।
केडीए उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है। सोमवार को भी 16 कोचिंग सेंटरों को सील किया गया था, जिससे अब तक सील किए गए सेंटरों की कुल संख्या 26 हो गई है। इस बीच, पुलिस कमिश्नर ने कोचिंग सेंटर संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की है, जिसमें सुरक्षा मानकों को लेकर कई अहम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, शहर के अधिकांश कोचिंग सेंटर फिलहाल बंद कर दिए गए हैं।
कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा मानकों का अभाव
कई कोचिंग सेंटरों में अग्निशमन सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। काकादेव इलाके में जिन कोचिंग सेंटरों में कक्षाएं चल रही थीं, वहां से पहले छात्र-छात्राओं को बाहर निकाला गया और फिर केडीए अधिकारियों ने उन्हें सील कर दिया। केडीए सचिव अभय पांडेय ने बताया कि यह कदम छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अग्निशमन सुरक्षा उपकरण और आवश्यक इंतजामों के बाद ही इन सेंटरों से सील हटाई जा सकेगी।
लखनऊ हादसे में कानपुर के युवाओं की मौत
लखनऊ के गेमिंग जोन अग्निकांड में कानपुर के दो दोस्तों, संयम विज और सूरजभान की भी दुखद मौत हुई है। दोनों लखनऊ की एक बिल्डिंग में स्थित एनिमेशन शॉप में थ्रीडी आर्टिस्ट के तौर पर काम करते थे। गोविंदनगर निवासी 24 वर्षीय संयम विज का शव मंगलवार सुबह घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। संयम के पिता का 15 साल पहले निधन हो गया था और वह लखनऊ में पिछले तीन सालों से नौकरी कर रहा था।
कानपुर में भी बड़े हादसे का खतरा
लखनऊ जैसे दिल दहला देने वाले हादसे कानपुर में भी कभी भी हो सकते हैं। काकादेव और आसपास के इलाकों की संकरी गलियों में खुले 350 से अधिक कोचिंग संस्थान 25 हजार से अधिक छात्रों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। भविष्य संवारने के नाम पर ये संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तो दे रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। अधिकतर कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी उपकरण नहीं लगे हैं या फिर वे एक्सपायर हो चुके हैं। साथ ही, अधिकांश संस्थानों में बाहर निकलने का केवल एक ही संकरा रास्ता है। ऐसी स्थिति में, यदि लखनऊ जैसी कोई घटना हुई, तो एक बड़ा हादसा होना तय है। काकादेव, शारदा नगर, गीता नगर, पांडु नगर जैसे इलाकों में इंजीनियरिंग, मेडिकल, बैंकिंग, एसएससी, कृषि और सिविल सर्विसेज जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है, जिसके लिए शहर और आसपास के क्षेत्रों से छात्र आते हैं। एक कोचिंग संस्थान में अलग-अलग बैचों में 500 से 2000 छात्र पढ़ते हैं, और एक समय में 300 से 800 छात्र संस्थान के अंदर मौजूद रहते हैं। ऐसी आपदा की स्थिति में छात्रों को सुरक्षित निकालना बेहद मुश्किल होगा। कई कोचिंग संस्थान तो बेसमेंट में भी चल रहे हैं। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा खानापूर्ति के लिए ही अभियान चलाया जाता है, जिसके चलते अधिकतर कोचिंग संचालकों ने अपना पंजीकरण तक नहीं कराया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा को लेकर पुलिस, फायर विभाग और केडीए की ओर से कार्रवाई की जाती है।
