अभ्युदय कोचिंग भर्ती घोटाला: संयुक्त निदेशक निलंबित, जांच के आदेश | UP Abhyuday scam
उत्तर प्रदेश में गरीब मेधावी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराने वाली अभ्युदय कोचिंग योजना में बड़े भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले में समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील कुमार विसेन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती में गंभीर अनियमितताएं बरतने का आरोप है। यह कार्रवाई तब हुई जब जांच में पाया गया कि कुल 69 कोर्स कोआर्डिनेटरों में से 48 अयोग्य उम्मीदवारों को भर्ती किया गया था, जबकि केवल 21 ही पात्र पाए गए।
इस घोटाले की शिकायत समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण से 29 अक्टूबर को की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि नियमानुसार पीसीएस मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही कोर्स कोआर्डिनेटर बन सकता है, लेकिन इस नियम की घोर अनदेखी की गई। साक्षात्कार और अभिलेखों के सत्यापन के लिए गठित विभागीय कमेटी ने लापरवाही बरती। अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्रों का सत्यापन ठीक से नहीं किया गया और चयन प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज विभागीय पत्रावली में अनुपलब्ध पाए गए। चयन प्रक्रिया की निगरानी करने वाली समितियों के पास भी साक्षात्कार और सत्यापन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, आउटसोर्सिंग कंपनी अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अब इस मामले में विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं, जिसमें सेवानिवृत्त हो चुके संयुक्त निदेशक आरके सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, गलत शपथ पत्र देकर भर्ती हुए अयोग्य कोर्स कोआर्डिनेटरों पर भी गाज गिर सकती है। यह घटना सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है, जिससे जनता का विश्वास प्रभावित होता है।
