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मोक्षदा एकादशी पर तुलसी से जुड़ी ये गलतियां आपको फल से वंचित कर सकती हैं

By Nov 26, 2025

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो इस वर्ष 1 दिसंबर को मनाई जाएगी। यह पावन तिथि गीता जयंती के रूप में भी मनाई जाती है, जो पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता के अवतरण का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

धर्म शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन भगवान की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी जाती है। मोक्षदा एकादशी के दिन तुलसी के संबंध में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि प्रभु श्रीहरि की कृपा बनी रहे और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं। इस कारण, इस पवित्र दिन पर तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना या तुलसी दल तोड़ना उनके व्रत में विघ्न उत्पन्न कर सकता है। इसलिए, एकादशी के दिन इन कार्यों से बचना चाहिए। यदि आपको पूजा के लिए तुलसी दल की आवश्यकता है, तो आप एक दिन पूर्व ही पत्ते तोड़कर रख सकते हैं या गमले में गिरे हुए पत्तों का भी प्रयोग कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, तुलसी के पौधे के आसपास की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तुलसी के गमले के पास जूते-चप्पल, झाड़ू या कूड़ेदान जैसी अपवित्र वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। ऐसा करने से माता लक्ष्मी अप्रसन्न हो सकती हैं, जिससे धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि एकादशी के दिन तुलसी को छूने की मनाही होती है, परंतु शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय आप सात या ग्यारह बार तुलसी की परिक्रमा कर सकते हैं और तुलसी मंत्रों का जप भी कर सकते हैं। यह उपाय भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है।

भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है और उनके भोग के बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए, मोक्षदा एकादशी की पूजा के दौरान विष्णु जी के भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें। इन सरल नियमों का पालन करके आप भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और मोक्षदा एकादशी के व्रत का संपूर्ण फल पा सकते हैं।

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