दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’: 12 दिन से जारी संकट, अब और बिगड़ सकते हैं हालात
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का गंभीर संकट लगातार बना हुआ है। हवा की रफ्तार में मामूली वृद्धि और आसमान साफ रहने के बावजूद, मंगलवार को वायु गुणवत्ता में आंशिक सुधार ही देखने को मिला। दिल्ली के 39 निगरानी केंद्रों में से 36 में प्रदूषण का स्तर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जो चिंता का विषय है। यह स्थिति लगातार 12वें दिन बनी रही।nnकेंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 353 रहा, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले, सोमवार को यह आंकड़ा 382 था। दिन में पश्चिमी हवाओं की गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जिसने प्रदूषण को कुछ हद तक कम करने में मदद की।nnहालांकि, दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, अगले छह दिनों के लिए वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ से लेकर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रहने की आशंका है। यह भविष्यवाणी नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं।nnसीपीसीबी के समीर ऐप के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को रोहिणी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर सबसे गंभीर रहा, जहां एक्यूआई 405 दर्ज किया गया। यह एकमात्र ऐसा केंद्र रहा जहां वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पाई गई। अन्य 38 केंद्रों पर भी स्थिति चिंताजनक बनी रही।nnमंगलवार को दोपहर तीन बजे के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर की हवा में पीएम 10 का स्तर 319 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 का स्तर 178.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। यह वायु गुणवत्ता मानकों से साढ़े तीन गुना अधिक है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।nnप्रदूषण के कारणों पर गौर करें तो, आईआईटीएम पुणे के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के विश्लेषण के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन का योगदान 19.6 प्रतिशत था, जो सभी स्रोतों में सबसे अधिक है। इसके विपरीत, पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का योगदान केवल 1.5 प्रतिशत रहा। बुधवार के लिए भी वाहनों के उत्सर्जन का योगदान 21.1 प्रतिशत और पराली जलाने का 1.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दर्शाता है कि शहरीकरण और वाहनों की बढ़ती संख्या प्रदूषण के मुख्य कारक हैं।nnयह स्थिति दिल्ली की वायु गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है, क्योंकि यह लगातार लंबे समय से खराब बनी हुई है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और यदि बाहर निकलना आवश्यक हो तो मास्क का प्रयोग करें।n”
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