0

चीन की नई चाल: LAC पर सैन्य ढांचा मजबूत, भारत की चिंता बढ़ी

By Nov 25, 2025

डोकलाम गतिरोध और गलवान घाटी की झड़प जैसी घटनाओं के बाद, भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की कवायद के बीच चीन की एक नई चाल सामने आई है, जो भारत के लिए बड़ी चुनौती और चिंता का सबब बन सकती है। सूत्रों के अनुसार, चीन तिब्बत में भारतीय सीमा के निकट अपने सैन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार कर रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने के उद्देश्य से, पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने लगातार सैन्य सुविधाओं, लॉजिस्टिक्स हब और कनेक्टिविटी को बढ़ाना जारी रखा है।

हाल ही में, चीन ने तिब्बत में लगभग 4,300 मीटर की ऊंचाई पर एक ड्रोन (यूएवी) परीक्षण केंद्र स्थापित किया है। इस अत्याधुनिक सुविधा से पीएलए और चीनी ड्रोन निर्माताओं को खराब मौसम और अत्यधिक ऊंचाई वाली परिस्थितियों में भी यूएवी का परीक्षण करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस नई सुविधा में एक नवनिर्मित हवाई क्षेत्र के साथ 720 मीटर का रनवे, चार हैंगर और प्रशासनिक भवन भी शामिल हैं।

भारतीय सीमा पर चीन की ये हरकतें दक्षिण चीन सागर में उसकी रणनीतियों से मेल खाती हैं, जहां उसने कब्जे वाली जमीन पर सैन्य सुविधाएं स्थापित कीं, हथियार जमा किए और अपनी निरंतर उपस्थिति बनाए रखकर उन इलाकों पर नियंत्रण मजबूत किया। एलएसी पर सीमा को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है, और इसी बीच चीन तिब्बत तथा शिनजियांग जैसे क्षेत्रों में अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है, जो पीएलए के वेस्टर्न थिएटर कमान के अधीन आते हैं।

सितंबर 2025 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में परिवहन नेटवर्क की कमी पीएलए के लिए सीमा पर सैनिकों को भेजने में एक बड़ी बाधा रही है। हालांकि, तिब्बत में और उसके आसपास सड़क, हवाई और रेल नेटवर्क के हालिया विस्तार ने अब इस इलाके में पीएलए की क्षमता को काफी बढ़ाया है। तिब्बत आटोनामस रीजन (टीएआर) के अधिकारियों ने भी वर्ष 2025 के लिए सीमा पर चौकसी और तैनाती बढ़ाने को प्राथमिकता बताया है।

चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना (2021-2025) के तहत, तिब्बत में सैन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 30 बिलियन डॉलर आवंटित किए गए हैं। किंघाई-तिब्बत कॉरिडोर तिब्बत को आपूर्ति होने वाले अधिकांश सामानों को संभालता है। चीन के सरकारी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति शी चिनफिंग के कार्यकाल में तिब्बत के राजमार्ग नेटवर्क को लगभग दोगुना कर दिया गया है, जो 2012 में 65,198 किमी से बढ़कर 2023 में 1,22,712 किमी हो गया है। यह व्यापक बुनियादी ढांचा विस्तार एलएसी पर चीन की सैन्य तैयारियों को पुख्ता करने के उसके इरादों की ओर इशारा करता है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें