आगरा फाउंड्री उद्योग को नई गाइडलाइन से मिलेगी राहत, NEERI करेगा तैयार
आगरा का फाउंड्री उद्योग, जो शहर की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जल्द ही एक नई दिशा की ओर बढ़ सकता है। नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) इस उद्योग के लिए एक विशेष सेक्टोरल गाइडलाइन तैयार करेगा। यह पहल उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) द्वारा की जा रही है, जो फाउंड्री एसोसिएशन से आवश्यक जानकारी एकत्र करके NEERI को प्रदान करेगा।
इस गाइडलाइन का उद्देश्य उद्योग को तीन दशक से अधिक समय से सता रही समस्याओं से उबारना है। आगरा में फाउंड्री नगर, नुनिहाई और रामबाग जैसे क्षेत्रों में लगभग 80 इकाइयां ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और मशीनरी पार्ट्स का निर्माण करती हैं। ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में कोयले पर प्रतिबंध के बाद, इन इकाइयों ने बिजली और गैस आधारित भट्टियों को अपनाया था।
सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन में, NEERI इस गाइडलाइन को तैयार कर रहा है। TTZ अथॉरिटी की एक बैठक में, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने UPPCB को फाउंड्री एसोसिएशन से संपर्क कर आवश्यक तकनीकी जानकारी, जैसे कि भट्टियों का आकार, क्षमता और उनसे उत्पन्न होने वाले धुएं की मात्रा, एकत्र करने और NEERI को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
फाउंड्री उद्योग के प्रतिनिधियों का मानना है कि इस नई गाइडलाइन से उनकी मुश्किलें कम होंगी और उद्योग को पुनर्जीवित होने में मदद मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश से पहले आगरा में फाउंड्री इकाइयों की संख्या 250 से अधिक थी, जो अब घटकर लगभग 80 रह गई है। यह गाइडलाइन उद्योग के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
