गंगा वन और भागीरथ वन: कासगंज में वायु शोधन के मजबूत स्तंभ
भले ही दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की खराब वायु गुणवत्ता का असर कासगंज पर भी पड़ रहा हो, लेकिन चंदनपुर घटियारी स्थित गंगा वन और दतलाना गांव स्थित भागीरथ वन स्थानीय स्तर पर हवा को शुद्ध करने में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। मंगलवार को कासगंज का एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 188 दर्ज किया गया, जो मध्यम से खराब श्रेणी की ओर इशारा करता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दोनों वन क्षेत्र कासगंज में न होते, तो वायु प्रदूषण की स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
गंगा नदी के किनारे लगभग 412 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इन वनों ने पिछले कुछ वर्षों में कासगंज की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक ठोस नींव रखी है। सोरों के चंदनपुर घटियारी में स्थित गंगा वन में 51 विभिन्न प्रजातियों के एक लाख 11 हजार से अधिक पेड़ हैं, जबकि सोरों के ही दतलाना गांव में भागीरथ वन में तीन लाख 51 हजार से अधिक पेड़ लगाए गए हैं। इन पेड़ों की सघनता ने न केवल क्षेत्र की हरियाली को बढ़ाया है, बल्कि एक अनुकूल माइक्रो-क्लाइमेट (स्थानीय जलवायु) भी तैयार किया है।
स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इन वृक्षों की घनी पत्तियों और तनों की सतहें हवा में मौजूद धूल, स्मॉग और सूक्ष्म कणों को प्रभावी ढंग से अवशोषित करने में सक्षम हैं। इससे वायुमंडल में प्रदूषकों का स्तर कम होता है और आसपास की हवा तुलनात्मक रूप से अधिक स्वच्छ रहती है। इसके अतिरिक्त, बढ़े हुए हरित आवरण के कारण दिन के समय तापमान में कमी और आर्द्रता के स्तर में संतुलन बना रहता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
वन विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि पिछले पांच वर्षों में इन वनों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण और ऑक्सीजन के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। भागीरथ वन विशेष रूप से स्थानीय वायु शोधन में बहुत प्रभावी साबित हुआ है, जिसने दिल्ली-एनसीआर से आने वाली प्रदूषित हवा के प्रभाव को कासगंज में काफी हद तक कम करने में मदद की है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, गंगा वन और भागीरथ वन कासगंज के लिए प्राकृतिक एयर फिल्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह बढ़ती हरियाली न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि जिले की वायु गुणवत्ता को सुधारने का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।
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