मुजफ्फरनगर में एसआईआर की धीमी प्रगति पर प्रशासन सख्त, 22 अधिकारी निलंबित
मुजफ्फरनगर जनपद में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण (एसआईआर) की धीमी गति पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कमिश्नर और जिलाधिकारी द्वारा इस मामले में गहरी नाराजगी जताए जाने के बाद, सिटी मजिस्ट्रेट सहित कुल 22 अधिकारियों और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह कदम जांच में बरती जा रही लापरवाही और ढिलाई के प्रति प्रशासन के कड़े रुख को दर्शाता है, और इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जनपद में एसआईआर कार्य की प्रगति बेहद धीमी है। अब तक कुल 21.12 लाख मतदाताओं में से केवल 465771 मतदाताओं के एसआईआर फार्म ही संबंधित पोर्टल पर अपलोड किए जा सके हैं, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 22.05 प्रतिशत है। यह स्थिति निर्धारित समय-सीमा के मुकाबले काफी पिछड़ी हुई है।
इस मामले में उप जिला निर्वाचन अधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईपीओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के तौर पर कई अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। जनपद में कुल 1982 बूथों को आधार मानकर यह कार्य संचालित किया जा रहा है, और इतने ही बीएलओ को तैनात किया गया है। जिला और तहसील स्तर के अधिकारियों को इस प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर, जिला गन्ना अधिकारी संजय सिंह सिसौदिया, जिला समाज कल्याण अधिकारी कमलेश कुमार और खंड शिक्षा अधिकारी सदर ध्यानचंद शामिल हैं। इनके अलावा 18 बीएलओ को भी लापरवाही के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट को यह नोटिस कमिश्नर कार्यालय से जारी हुआ है, जबकि अन्य नोटिस जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा भेजे गए हैं।
सभी संबंधित अधिकारियों से एसआईआर कार्य में धीमी प्रगति का स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्हें आगामी दो दिनों के भीतर कार्य में उल्लेखनीय सुधार लाने की सख्त हिदायत दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में कार्य में सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम चुनावों से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यों में तत्परता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
