ट्रेड फेयर में लिट्टी-चोखा का जलवा, विदेशी सामान पर भी लगी भीड़
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के अपने अंतिम चरण में प्रवेश करने के साथ ही, 44वें संस्करण में आगंतुकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। सोमवार को लगभग 70,000 (69,846) लोगों ने मेले का दौरा किया, जो सप्ताहांत के बाद भी जारी उत्साह को दर्शाता है। हर हॉल और पवेलियन में लोगों की अच्छी-खासी उपस्थिति देखी जा रही है, जिसमें स्कूली बच्चों की संख्या भी उल्लेखनीय है। विभिन्न स्टॉलों पर आकर्षक छूट मिलने से लोग खरीदारी का भरपूर आनंद ले रहे हैं।
हॉल नंबर 1 स्थित विदेशी पवेलियन आगंतुकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। अफगानिस्तान के ड्राई फ्रूट्स, दुबई के लेडीज सूट, थाईलैंड के सजावटी फूल और तुर्की की फैंसी लाइटें लोगों को खूब भा रही हैं। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों के पवेलियन भी अपने अनूठे हस्तशिल्प, लोक कलाओं और कारीगरों के प्रदर्शन से दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। आगंतुक स्थानीय कारीगरों और उनकी कला का प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हैं।
मेले के फूड कोर्ट में भी रौनक छाई हुई है, जहाँ राजस्थानी, पंजाबी और बिहारी व्यंजनों का लोग लुत्फ़ उठा रहे हैं। बिहार के प्रसिद्ध लिट्टी-चोखा की मांग विशेष रूप से अधिक है। ‘दीदी की रसोई’ स्टॉल पर ‘मिस्टर लिट्टी वाला’ का लिट्टी-चोखा लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, सभी बिहारी स्टॉलों पर लिट्टी-चोखा की जबरदस्त मांग देखी जा रही है। लिट्टी-चोखा के अलावा, अनरसा, लंगलाता, ठेकुआ और गुजिया जैसे पारंपरिक व्यंजन भी खूब पसंद किए जा रहे हैं।
घर के सामान की खरीदारी के लिए आगंतुक हॉल नंबर 9, 10 और 11 की ओर रुख कर रहे हैं। सरस आजीविका मेले में भी काफी भीड़ देखी जा रही है, जहाँ केले के चिप्स, रागी पापड़, चावल के पापड़, उड़द दाल और लहसुन के पापड़ जैसे उत्पाद लोकप्रिय हैं। कर्नाटक स्टॉल के प्राकृतिक खाद्य उत्पाद, जैसे अंजीर हलवा, अनानास हलवा, बादाम मिक्स हलवा, कुलथी दाल नमकीन, मूंगफली नमकीन और बेसन नमकीन भी दिल्ली के लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
इस वर्ष, झारखंड पवेलियन कला, संस्कृति और कारीगरों को सशक्त बनाने के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। सोमवार को उद्योग सचिव-सह-आवासीय आयुक्त ने सभी स्टॉलों का दौरा कर उनकी सराहना की और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। राज्य की समृद्ध लोक कलाएँ, विशेष रूप से पैतकर और सोहराई, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के सरकारी प्रयास देश भर से आए आगंतुकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। सोहराई, खोवर, जादोपटिया और पैतकर पेंटिंग न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की पीढ़ियों पुरानी कला को नए बाजार के अवसर भी प्रदान करती हैं।
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