नए श्रम कानून: मजदूरों के फायदे, ठेकेदारों की बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। देश में चार नए श्रम संहिताओं के लागू होने के साथ ही रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कार्यरत लगभग 7.1 करोड़ श्रमिकों के जीवन में एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और वेतन ढांचे में सुधार लाना है, जिससे उन्हें कई महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होंगे।
सबसे अहम बदलावों में से एक है वेतन संरचना का। अब भत्तों को अलग कर मूल वेतन को कुल वेतन का न्यूनतम 50% करना अनिवार्य होगा। इसका सीधा असर भविष्य निधि (पीएफ) और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी श्रमिक का कुल वेतन 30,000 रुपये है, तो पहले जहां मूल वेतन 15,000 रुपये मानकर पीएफ कटौती लगभग 1,800 रुपये होती थी, वहीं नए नियमों के तहत मूल वेतन 20,000-25,000 रुपये तक होने की संभावना है। इससे पीएफ कटौती और जमा राशि बढ़कर 2,400-3,000 रुपये हो जाएगी, जिससे श्रमिक के खाते में हर महीने 600 से 1,200 रुपये अतिरिक्त जमा होंगे।
ग्रेच्युटी के नियमों में भी राहत दी गई है। अब तक कई श्रमिक प्रोजेक्ट आधारित काम के कारण कुछ साल बाद साइट बदलने पर ग्रेच्युटी से वंचित रह जाते थे। नए नियमों के तहत, केवल एक साल की सेवा पर भी ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 400-500 मजदूरों वाली एक बड़ी साइट पर डेवलपर्स की सालाना ग्रेच्युटी देनदारी 1 से 1.5 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है, जो अब सीधे श्रमिकों को लाभ पहुंचाएगी।
इसके अलावा, हाईवे, मेट्रो या टाउनशिप जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में अक्सर 10-12 घंटे की शिफ्ट आम होती है। नए श्रम कानूनों के तहत ओवरटाइम भुगतान की दर दोगुनी कर दी गई है। अब 8 घंटे से अधिक काम करने पर प्रत्येक अतिरिक्त घंटे के लिए दोगुना मेहनताना मिलेगा। यदि कोई श्रमिक महीने में 100 घंटे का ओवरटाइम करता है, तो उसकी आय में 5,000 से 8,000 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है।
ठेका मजदूरों को भी अब कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), पीएफ, मातृत्व लाभ और पेंशन जैसी सुविधाएं आसानी से मिलेंगी, जबकि वर्तमान में अनौपचारिक क्षेत्र के लगभग 90% श्रमिक इन सुविधाओं से वंचित हैं। सुरक्षा मानकों में सख्ती से साइट पर होने वाले हादसों में कमी आने की उम्मीद है, जिससे श्रमिकों के चिकित्सा और बीमा पर होने वाला खर्च घटेगा और वे लंबे समय तक स्वस्थ रहकर कमाई कर सकेंगे।
हालांकि, डेवलपर्स का मानना है कि इन सुधारों से प्रोजेक्ट की कुल लागत में 8-12% तक की वृद्धि हो सकती है। स्क्वायर यार्ड्स के हितेश सिंघला के अनुसार, “शुरुआत में प्रशासनिक खर्चों में वृद्धि होगी, लेकिन दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में, श्रमिकों की बढ़ी हुई सुरक्षा और स्थिरता से उत्पादकता में सुधार होगा, जो अंततः उद्योग के लिए फायदेमंद होगा।” कुल मिलाकर, ये नए श्रम कानून श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित और अधिक लाभकारी कार्य वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
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