गाजियाबाद-नोएडा में प्रतिबंध, दिल्ली एमसीडी घटनाओं का इंतजार
दिल्ली के पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जैसे जिलों में पिटबुल समेत कई खतरनाक कुत्तों की नस्लों को पालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके विपरीत, दिल्ली में नगर निगम (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) अभी भी किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद पड़ोसी राज्यों की तरह प्रतिबंध का निर्णय लिया जा सके। एमसीडी फिलहाल पिटबुल जैसी 23 खतरनाक नस्लों को लेकर कोर्ट के आदेश के बाद ही कोई निर्णय लेने की स्थिति में है।
अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर भी असमंजस है कि कुछ राज्यों के उच्च न्यायालयों ने केंद्र सरकार के मार्च 2024 के सर्कुलर पर रोक लगा दी है, तो क्या वे इसे लागू कर सकते हैं या नहीं। हालांकि, एमसीडी के अधिकारी इस पक्ष में हैं कि खतरनाक नस्लों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि वे इस संबंध में एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।
दिल्ली में औसतन हर साल लगभग 3500 पालतू कुत्तों का पंजीकरण होता है, जिसके लिए 500 रुपये का शुल्क लिया जाता है और एंटी-रेबीज टीकाकरण का प्रमाण पत्र आवश्यक होता है। लेकिन, असल में दिल्ली में पालतू कुत्तों की संख्या इससे कहीं अधिक है। एमसीडी अक्सर ऐसे मामलों में तब तक कोई कार्रवाई नहीं करती जब तक कि कोई घटना न हो जाए, जिसके बाद दिखावटी कार्रवाई की जाती है।
दिल्ली की सड़कों और पार्कों में विभिन्न नस्लों के कुत्ते टहलाते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं। इसका एक बड़ा व्यापार वर्ग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सक्रिय है, जो रील और तस्वीरों के माध्यम से ऐसे कुत्तों को बेचते हैं। पिटबुल जैसी नस्लें 20 हजार रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक की कीमत में बेची जाती हैं। यह अवैध व्यापार झुग्गी-झोपड़ी और अनधिकृत कॉलोनियों में भी फलफूल रहा है। इस पर रोक लगाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग की है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट नीति घोषित नहीं की गई है और न ही अवैध ब्रीडिंग करने वालों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई हो रही है।
हाल ही में, एमसीडी को एक पिटबुल कुत्ते द्वारा हमला करने की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही एमसीडी की टीम मौके पर पहुंची और कुत्ते के मालिक से पंजीकरण प्रमाण पत्र मांगा। प्रमाण पत्र न होने पर कुत्ते को जब्त कर लिया गया और नजफगढ़ स्थित एक स्वयंसेवी संस्था के शेल्टर होम में भेज दिया गया। वहां कुत्ते की रेबीज की जांच की जाएगी और वह वहीं रहेगा। यह घटना दिल्ली में खतरनाक कुत्तों के प्रबंधन और नियंत्रण को लेकर बनी नीतिगत खामियों को उजागर करती है।
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