इथियोपिया में 10 हजार साल बाद ज्वालामुखी फटा, भारत की ओर बढ़ा राख का गुबार
अफ्रीकी देश इथियोपिया में एक अभूतपूर्व भूवैज्ञानिक घटना घटी है, जहाँ लगभग 10,000 साल बाद एक ज्वालामुखी फटा है। इस विस्फोट से निकले राख और धुएं का गुबार आसमान में इतनी ऊंचाई तक फैल गया है कि उसने उत्तरी अरब सागर के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। वैज्ञानिकों ने इस घटना को असाधारण बताते हुए कहा है कि इस तरह का विस्फोट सदियों में एक बार देखने को मिलता है।
ज्वालामुखी से निकले राख के कणों के हवा में फैलने से विमानन सुरक्षा पर तत्काल प्रभाव पड़ा है। कई प्रमुख एयरलाइंस ने एहतियात के तौर पर अपनी उड़ानों को रद्द कर दिया है, खासकर उन मार्गों पर जो प्रभावित क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। इसके अलावा, एयरलाइंस को फ्लाइट प्लानिंग और रूट एडजस्ट करने के लिए परिचालन मैनुअल की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और यात्रा योजनाओं में बड़े बदलाव की नौबत आ गई है।
यह घटना न केवल विमानन क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, बल्कि इसके पर्यावरणीय प्रभावों का भी अध्ययन किया जा रहा है। राख के कण वायुमंडल में लंबे समय तक बने रह सकते हैं और जलवायु पर भी असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भूवैज्ञानिक गतिविधियां पृथ्वी की आंतरिक संरचना में हो रहे परिवर्तनों का संकेत हो सकती हैं। हालांकि, अभी तक इस विस्फोट के किसी बड़े स्थानीय प्रभाव की कोई रिपोर्ट नहीं है, लेकिन दूरगामी परिणामों पर वैज्ञानिकों की पैनी नजर है। यह घटना हमें प्रकृति की अप्रत्याशित शक्ति की याद दिलाती है और वैज्ञानिक समुदाय के लिए आगे के शोध का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
