बठिंडा में मौत बनकर दौड़ रहे अनफिट वाहन, आरटीए की लापरवाही पर सवाल
बठिंडा की सड़कों पर हजारों ऐसे वाहन मौत बनकर दौड़ रहे हैं, जिनका न तो फिटनेस सर्टिफिकेट है और न ही बीमा। परिवहन विभाग की घोर लापरवाही के कारण ये अनफिट वाहन खुलेआम सड़कों पर नजर आ रहे हैं, जिससे आम यात्रियों की जान लगातार खतरे में बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, बीते कई सालों से इन अनफिट वाहनों का कोई सर्वे तक नहीं कराया गया है, जिसके चलते विभाग के पास ऐसे वाहनों का कोई ठोस आंकड़ा ही मौजूद नहीं है।
आरटीए दफ्तर के अधीन बठिंडा और मानसा दोनों जिले आते हैं, और वाहनों की पासिंग भी यहीं से होती है। नियमों के अनुसार, 8 साल पुराने वाहनों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है, जबकि 8 साल से कम पुराने वाहनों के लिए यह अवधि दो साल है। हालांकि, विभाग के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि कितने वाहनों को नियमित रूप से फिटनेस सर्टिफिकेट मिल रहा है। इस लापरवाही का सीधा नतीजा यह है कि बीमा और फिटनेस फेल हो चुके वाहन सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं, जो किसी भी समय यात्रियों के लिए काल साबित हो सकते हैं।
सड़कों पर चलने वाले वाहनों की नियमित जांच न होने और जर्जर पुराने वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट देने में सख्ती न बरतने के कारण सड़क हादसों में वृद्धि देखी जा रही है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि आरटीए दफ्तर ने पिछले कई सालों में कभी भी सड़कों पर चल रहे अनफिट वाहनों की जांच करने की जहमत नहीं उठाई और न ही ऐसे किसी वाहन को सड़क से हटाया गया है। यहां तक कि जुगाड़ू और अनधिकृत वाहनों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक और गंभीर चिंता सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर है। जहां चंडीगढ़ जैसे शहरों में पिछली सीटों पर बैठने वालों के लिए भी सीट बेल्ट अनिवार्य है, वहीं बठिंडा में शायद ही कोई 5 फीसदी लोग ऐसे होंगे जो वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का इस्तेमाल करते हों। यह लापरवाही भी सड़क हादसों को गंभीर बना रही है। विभाग की इस निष्क्रियता और आम लोगों की जागरूकता की कमी, दोनों ही बठिंडा की सड़कों को असुरक्षित बना रहे हैं।
