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बेतिया से दिल्ली-कटरा की ओर यात्रियों की भारी भीड़, साप्ताहिक ट्रेनें भी अपर्याप्त

By Nov 22, 2025

पर्व-त्योहारों और विधानसभा चुनावों के संपन्न होते ही आनंद विहार सहित उत्तर भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बेतिया, नरकटियागंज और आसपास के स्टेशनों पर स्थिति ऐसी हो गई है कि ट्रेनों में चढ़ना-उतरना एक चुनौती बन गया है, जहाँ धक्का-मुक्की आम बात हो गई है।

टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहाँ घंटों इंतजार के बाद भी यात्रियों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही कई स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भीड़ पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।

रेलवे का मानना है कि त्योहारों के कारण घर आए प्रवासी मजदूर और नौकरीपेशा लोग अब वापस अपने काम पर लौट रहे हैं, जिसके चलते ट्रेनों पर दबाव कई गुना बढ़ गया है। अनुमान है कि आने वाले कुछ हफ्तों तक यह भीड़ इसी तरह बनी रह सकती है, जो रेलवे और यात्रियों दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

इस बढ़ती भीड़ को देखते हुए, यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भीड़ के कारण प्लेटफार्मों पर चढ़ने-उतरने में अफरातफरी की स्थिति बन रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए, स्टेशन प्रबंधन ने सभी ट्रेनों के ठहराव समय को दो मिनट से बढ़ाकर पांच मिनट करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यात्रियों को बिना जल्दबाजी और धक्का-मुक्की के आराम से ट्रेन में चढ़ने-उतरने का अवसर देना है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक भीड़ सामान्य नहीं हो जाती, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली रूट पर लोकप्रिय मानी जाने वाली सप्तक्रांति एक्सप्रेस और सत्याग्रह एक्सप्रेस में 20 दिसंबर तक कोई भी बर्थ उपलब्ध नहीं है। तत्काल और प्रीमियम श्रेणियों में भी लंबी प्रतीक्षा सूची दिखाई दे रही है। ऐसे में, कई यात्री सामान्य और जनरल कोचों में यात्रा करने को मजबूर हैं, जो अत्यंत असुविधाजनक है।

बैरिया निवासी संजीव राय, लड्डू कुमार और अनिल कुमार ने बताया कि वे दीपावली के अवसर पर घर आए थे, लेकिन अब वापस लौटने के लिए टिकट मिलना अत्यंत कठिन हो रहा है। उन्होंने कहा कि निजी नौकरियों में लंबी छुट्टियां मिलना संभव नहीं होता, इसलिए जल्दी लौटना आवश्यक है। मजबूरी में, वे जनरल बोगी में यात्रा करने या फिर स्लीपर क्लास में फाइन देकर किसी भी तरह सफर पूरा करने की बात कह रहे हैं।

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