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बाबा नीम करोली प्राकट्योत्सव: पीएम मोदी का संदेश, 27 को कॉफी टेबल बुक का अनावरण

By Nov 22, 2025

बाबा नीम करोली महाराज के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का अनावरण 27 नवंबर को उनकी पावन जन्मस्थली अकबरपुर, टूंडला में किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण अवसर पर, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना शुभकामना संदेश भेजा है, जो बाबा नीम करोली के आध्यात्मिक प्रभाव को रेखांकित करता है।

बाबा नीम करोली महाराज का प्राकट्योत्सव बुधवार से उनकी जन्मस्थली पर श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। इस उत्सव के उपलक्ष्य में, श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जो भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर रहा है। उत्सव का मुख्य दिवस 28 नवंबर को मनाया जाएगा, जिस दिन एक विशाल भंडारे का आयोजन होगा। आयोजकों को इस भंडारे में लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इस बड़े आयोजन के लिए प्रशासनिक अधिकारी भी तैयारियों में जुट गए हैं, जिसमें विशेष रूप से वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था शामिल है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए, पर्यटन विभाग ने एक भव्य सामुदायिक भवन का निर्माण करवाया है। इस भवन में एक साथ लगभग छह हजार श्रद्धालु विश्राम कर सकते हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को आवास की सुविधा मिल सकेगी।

उत्सव की श्रृंखला में 19 से 28 नवंबर तक विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक भागवत कथा और शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक भजन संध्या का कार्यक्रम चल रहा है। विशेष रूप से, 23 नवंबर को गायक कलाकार दीपक त्रिपाठी, 24 नवंबर को गायिका शिखा तिवारी, 25 नवंबर को मनीष शर्मा द्वारा सुंदर कांड पाठ एवं यूएसए के कृष्णदास द्वारा संगीत प्रस्तुति दी जाएगी। 27 नवंबर को प्रसिद्ध भजन गायक लखवीर सिंह लक्खा अपनी प्रस्तुति से भक्तों को मंत्रमुग्ध करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में बाबा नीम करोली महाराज के सत्य और करुणा के मार्ग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराज जी का प्रभाव राष्ट्रीयता, संस्कृति, भाषा और पंथ की बाधाओं से परे है, और उन्होंने असंख्य दिलों में जीवन के उच्च उद्देश्य को जागृत किया। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि महाराज जी की शिक्षाओं ने मानवता को याद दिलाया कि सच्चा ज्ञान दुनिया से भागने में नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से और दयालुता से इसमें शामिल होने में है। उन्होंने सद्भाव और एकता के व्यापक संदेश को रेखांकित किया, और सिखाया कि परमात्मा हर दिल में बसता है तथा सच्ची शांति भीतर ही है। निस्वार्थ सेवा को पूजा का सर्वोच्च रूप बताते हुए, उन्होंने आशीर्वाद दिया कि आत्म-जागरूकता की रोशनी हमारे जीवन में जलती रहे।

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