उद्घाटन से पहले ही ढह गई करोड़ों की सड़क, निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
सीतामढ़ी जिले में एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चोरौत-पुपरी सड़क का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है कि उद्घाटन से पहले ही यह कई जगहों पर टूटकर ढह गई है। इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण कार्य सितंबर 2023 में शुरू किया गया था और इसे मार्च 2025 तक पूरा किया जाना था।
सूत्रों के अनुसार, निर्माण के दौरान ही सड़क के एक हिस्से में काम चल रहा था तो दूसरे हिस्से में वह टूट रही थी। निर्माण कंपनी द्वारा सड़क की पैचिंग के लिए काले केमिकल का उपयोग कर मरम्मत का प्रयास किया गया, लेकिन यह प्रयास भी पूरी तरह विफल रहा। वर्तमान में, झटियाही चौक के पास से पिरौखर की ओर जाने वाली सड़क, जो एनएच 527 सी के समीप है, कई जगहों पर टूटकर धंसने लगी है।
हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि सड़क एक से डेढ़ फीट तक जगह-जगह धंस गई है। अब निर्माण कंपनी के पास धंसे हुए हिस्सों को फिर से बनाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। इसी कारण, निर्माण कंपनी द्वारा वाइब्रेटर मशीन का उपयोग करके इन धंसी हुई जगहों को तोड़ा जा रहा है ताकि वहां नई सड़क का निर्माण किया जा सके। वहीं, नाढ़ी घाट के पास पीचिंग वाली सड़क में भी जगह-जगह दरारें आ गई हैं। चिंता की बात यह है कि यह दोनों ही हिस्से अभी भारी वाहनों के लिए खोले भी नहीं गए हैं और ट्रक जैसे बड़े वाहन एनएच 527 सी का ही प्रयोग कर रहे हैं।
यह सड़क चार अलग-अलग भागों में विभाजित करके बनाई जा रही है। इसमें चोरौत हाई स्कूल से प्राथमिक विद्यालय उर्दू तक, झटियाही चौक से पिरौखर पंचायत भवन तक, नाढ़ी घाट पुल के दोनों ओर का कुछ हिस्सा और भिट्टा लचका से मधुबनी चौक तक का हिस्सा शामिल है। कुल लंबाई 7.980 किलोमीटर है। सड़क के दोनों ओर उच्च स्तरीय नाला का निर्माण किया गया है, लेकिन पानी की निकासी के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी मेसर्स विजेंद्र कुमार सिंह को सौंपी गई थी और पथ निर्माण विभाग, बिहार सरकार के इंजीनियरों की देखरेख में यह कार्य चल रहा था। हैरानी की बात यह है कि सड़क का काम पूरा होने से लगभग 10 महीने पहले ही इसकी कई बार मरम्मत करानी पड़ चुकी है, जो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
पूर्व में यह सड़क अत्यंत जर्जर अवस्था में थी, जिस कारण 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को एक घंटे से अधिक का समय लग जाता था। इस सड़क के निर्माण के लिए ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रखंड कार्यालय परिसर और निमबाड़ी बाजार में कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया था, ताकि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान हो सके।
