मतदाता सूची पुनरीक्षण के बहाने साइबर ठगी, चुनाव आयोग ने जारी की चेतावनी
बिहार में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद, निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का दूसरा चरण चला रहा है। इस प्रक्रिया के तहत, देश के 12 राज्यों में भी मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है। प्रत्येक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं, जिसमें इस बार मोबाइल नंबर की जानकारी भी शामिल है। इसी SIR प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए, साइबर ठगों ने मतदाताओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए, चुनाव आयोग ने देशभर के मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही, इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए किसी भी मोबाइल ऐप या APK फाइल को फोन में इंस्टॉल करने की भी कोई जरूरत नहीं है। आयोग के अनुसार, साइबर अपराधी मतदाताओं को ठगने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
साइबर ठग मतदाताओं को अपनी ठगी का शिकार बनाने के लिए खुद को बूथ लेवल अधिकारी (BLO) या निर्वाचन आयोग का कर्मचारी बताकर फोन करते हैं। वे दावा करते हैं कि मतदाता का मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी मतदाता सूची में अपडेट नहीं है और SIR प्रक्रिया को पूरा करने के लिए OTP की मांग करते हैं। जैसे ही मतदाता OTP साझा करते हैं, ठग उनके बैंक खातों से पैसे उड़ा देते हैं।
इसके अलावा, ये शातिर अपराधी मतदाताओं को SIR या ‘Voter Helpline’ जैसे नामों से फर्जी APK (Android Application Package) फाइलों के लिंक मैसेज या व्हाट्सएप पर भेज रहे हैं। यदि कोई मतदाता इन लिंक्स पर क्लिक करके ऐप को अपने फोन में इंस्टॉल कर लेता है, तो ठगों को फोन का पूरा नियंत्रण मिल जाता है। वे फोन से संवेदनशील डेटा चुरा सकते हैं और यहां तक कि पीड़ित के बैंक खाते को भी खाली कर सकते हैं।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे SIR फॉर्म भरने या मतदाता सूची में अपनी जानकारी अपडेट करने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को अपना OTP साझा न करें। यदि कोई ऐसे OTP की मांग करता है, तो तुरंत कॉल काट दें और ऐसे व्यक्ति को मना कर दें। यदि आपको बार-बार ऐसे कॉल या व्हाट्सएप मैसेज आते हैं, तो तत्काल स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दें। आयोग ने यह भी सलाह दी है कि SIR के नाम पर व्हाट्सएप या मैसेज पर भेजे गए किसी भी ऐप लिंक या APK फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल करने से बचें। इन सावधानियों को बरतकर मतदाता साइबर ठगों के जाल से सुरक्षित रह सकते हैं।
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