6 घंटे से कम नींद आपके शरीर में मचा सकती है ‘गंभीर हलचल’, डॉक्टर ने बताई खतरे की घंटी
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि छह घंटे से कम नींद लेकर भी काम चलाया जा सकता है? यदि हाँ, तो आपको सावधान होने की तत्काल आवश्यकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पर्याप्त नींद न लेना केवल थकान का कारण नहीं बनता, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर ‘गंभीर हलचल’ भी पैदा करता है, जिससे कई खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रोज देर रात तक मोबाइल चलाने, काम खत्म करने या बस यूं ही वक्त बिताने के चक्कर में छह घंटे से कम सोने की आदत धीरे-धीरे आपके शरीर के अंदर ऐसी हलचल पैदा करती है, जिसका असर लंबे समय तक महसूस होता है। शुरुआत में यह केवल थकान, चिड़चिड़ापन या भारीपन जैसा लग सकता है, लेकिन असल नुकसान तो भीतर शुरू हो चुका होता है। सूत्रों के अनुसार, नींद हमारे शरीर के लिए केवल आराम का समय नहीं है, बल्कि यह वह अवधि है जब शरीर खुद को ठीक करता है, हार्मोन को संतुलित करता है और दिमाग से विषाक्त पदार्थों को साफ करता है। जब रोजाना छह घंटे से कम नींद ली जाती है, तो यह पूरा तंत्र बिगड़ने लगता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कम नींद सबसे पहले एंडोक्राइन सिस्टम यानी हार्मोन तंत्र को प्रभावित करती है। इससे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, जिससे शरीर लगातार अलर्ट मोड में रहता है। इसके परिणामस्वरूप चिंता, चिड़चिड़ापन, ब्लड प्रेशर में वृद्धि और भूख पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। रोज छह घंटे से कम नींद लेने पर शरीर में इंसुलिन का संतुलन भी बिगड़ने लगता है, जिससे समय के साथ टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है।
नींद की कमी का सबसे गंभीर असर हृदय पर पड़ता है। शोध बताते हैं कि नियमित रूप से कम सोने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित दिल की धड़कन और हार्ट अटैक का जोखिम काफी अधिक होता है। इसके अतिरिक्त, नींद की कमी रक्त वाहिकाओं में सूजन को बढ़ाती है, जिससे हृदय लगातार दबाव में रहता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से ही हृदय संबंधी कोई बीमारी है, तो नींद की कमी उसके प्रभाव को और भी गंभीर बना सकती है।
गहरी नींद के दौरान, शरीर साइटोकिन्स जैसे प्रोटीन का निर्माण करता है, जो संक्रमण और सूजन से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब नींद कम होती है, तो इन प्रोटीनों का उत्पादन घट जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है और चोट या संक्रमण ठीक होने में अधिक समय लगता है। यह भी उल्लेखनीय है कि लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर शरीर में लगातार सूजन बढ़ जाती है, जो मोटापे, गठिया और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ी हुई है।
कम नींद का असर दिमाग पर भी तुरंत दिखाई देने लगता है। केवल एक रात की कम नींद भी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, प्रतिक्रिया समय और निर्णय लेने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
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