मेडिकल कॉलेजों में ‘एंटी-नेशनल’ गतिविधियों पर लगेगी रोक, NMC की नई गाइडलाइन
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) देश भर के सभी मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करने की तैयारी में है। इस नई गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से यह निर्देश दिया जाएगा कि संस्थान और उनके कैंपस किसी भी प्रकार की राष्ट्र-विरोधी (एंटी-नेशनल) गतिविधियों से पूर्णतः दूर रहें और अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
इस कदम का तात्कालिक कारण अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कुछ डॉक्टरों की गिरफ्तारी को माना जा रहा है। इन डॉक्टरों पर हाल ही में दिल्ली के लाल किले के पास हुए एक धमाके से जुड़े जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल से संपर्क रखने का गंभीर आरोप है। इस घटना ने चिकित्सा समुदाय और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और राष्ट्रवाद के प्रति जागरूकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NMC के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कमीशन की एथिक्स और मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड इस एडवाइजरी को अंतिम रूप दे रही है। इसे सभी मेडिकल संस्थानों को भेजा जाएगा और इसमें डॉक्टरों व छात्रों के आचरण, उनकी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखने पर विशेष बल दिया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि अल-फलाह मेडिकल कॉलेज का भविष्य फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर चल रही जांच के नतीजों पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाली रिपोर्टों के आधार पर ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी हरियाणा स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत संचालित होती है और यह केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि कई अन्य गैर-चिकित्सा पाठ्यक्रम भी प्रदान करती है। इस कॉलेज को वर्ष 2019 में मान्यता प्राप्त हुई थी और 2025-26 सत्र के लिए इसकी सभी 150 एमबीबीएस सीटें भी भरी जा चुकी हैं।
नेशनल मेडिकल कमीशन ने कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है और उन्हें आश्वस्त किया है कि किसी भी सूरत में उनके शैक्षिक भविष्य को खराब नहीं होने दिया जाएगा। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि निर्दोष छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और उनकी पढ़ाई बाधित नहीं होगी।
इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी संस्था से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर मारे गए छापों के बाद हुई है। ED की जांच अब अल-फलाह ट्रस्ट, उससे जुड़ी अन्य संस्थाओं और यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक व वित्तीय कामकाज की गहराई से पड़ताल कर रही है।
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