कनाडा में रह रहे दंपती को दिल्ली HC से बड़ी राहत, वर्चुअल पेशी को मिली मंजूरी
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कनाडा में रह रहे एक दंपती को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा है कि वीजा और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए वर्चुअल स्पष्टीकरण पर्याप्त है, जिससे दूर रहने वाले या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में असमर्थ आवेदकों को बड़ी सुविधा होगी।nnन्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने सरोगेसी से जुड़ी कार्यवाही में भाग लेने के लिए कनाडा से वर्चुअली पेश होने की अनुमति देते हुए कहा कि डिस्ट्रिक्ट मेडिकल बोर्ड को मुख्य रूप से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड की जांच करनी है। इसलिए, उसे इस चरण में दंपती की भौतिक उपस्थिति पर जोर नहीं देना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि बोर्ड इस मामले में व्यावहारिक दृष्टिकोण न अपनाए। कोर्ट के अनुसार, यह काम काफी हद तक मेडिकल रिकॉर्ड की जांच पर निर्भर करता है, और यदि दंपती से किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता होती है, तो वर्चुअल बातचीत ही पर्याप्त होगी।nnअदालत ने डिस्ट्रिक्ट मेडिकल बोर्ड के मार्च के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उसने दंपती को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि सरोगेसी रेगुलेशन-2023 के तहत स्टेट बोर्ड के लिए वर्चुअल सुनवाई आवश्यक है, ऐसे में डिस्ट्रिक्ट मेडिकल बोर्ड के लिए भी वर्चुअल सुनवाई करने के लिए तैयार होने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता दंपती का अधिकृत प्रतिनिधि पूरे मेडिकल रिकॉर्ड के साथ बोर्ड के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होगा।nnयह मामला एक ऐसे दंपती का था जिनकी शादी 2015 में हुई थी और उनका कोई बच्चा नहीं है। वे 2022 से कनाडा में रह रहे हैं और वहां काम कर रहे हैं। याचिकाकर्ता दंपती ने दिल्ली साउथ डिस्ट्रिक्ट के मेडिकल बोर्ड के समक्ष जेस्टेशनल सरोगेसी के लिए मेडिकल इंडिकेशन का सर्टिफिकेट मांगा था और वर्चुअल सुनवाई के माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने विदेश में रहने और नौकरी करने की वजह से शारीरिक रूप से उपस्थित होने में आने वाली दिक्कतों और लॉजिस्टिक समस्याओं का हवाला दिया था। साथ ही, कम समय में अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए छुट्टी की मंजूरी लेने और अधिक खर्च का भी उल्लेख किया था।nnइसके विपरीत, मेडिकल बोर्ड ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देते हुए एक नोटिस जारी किया था और वर्चुअल भागीदारी की अनुमति नहीं दी थी। इस नोटिस को दंपती ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बोर्ड के अधिवक्ता ने इस अपील का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि किसी भी तरह की संभावित परेशानी से बचने के लिए व्यक्तिगत संपर्क आवश्यक है। लेकिन हाई कोर्ट ने दंपती के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वर्चुअल स्पष्टीकरण को पर्याप्त माना है।”
माना हैरतअंगेज और पर्याप्त माना है।
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