आतंकवाद की नई चाल: दिल्ली हमले ने बढ़ाई चिंता, सतर्कता जरूरी
भारत के प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करने वाले लाल किले के निकट हुआ आतंकी हमला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। हालाँकि सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा के प्रति बने भरोसे में सेंध लगाने का काम किया है। यह भी माना जा रहा है कि हाल ही में फरीदाबाद में आतंकियों के मॉड्यूल का भंडाफोड़ और भारी मात्रा में विस्फोटक की बरामदगी से हताश आतंकियों ने दिल्ली में यह धमाका किया।
आतंकियों ने राजधानी के एक प्रमुख और व्यस्त इलाके को निशाना बनाया, जो ऐतिहासिक, वाणिज्यिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हमले के लिए चुना गया समय भी काफी व्यस्तता वाला था, जिससे स्पष्ट होता है कि उनका इरादा अधिक से अधिक नुकसान पहुँचाना था। इस घटना ने आतंकवाद से सुरक्षा को लेकर बने आवरण और भरोसे पर निश्चित रूप से चोट पहुँचाई है।
जांच एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की गहनता से जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने की प्रबल संभावना है। पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि हाल की भारतीय कार्रवाइयों से सकते में आए पाकिस्तान ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। यही कारण है कि शुरुआती जांच में इस हमले के तार बांग्लादेश और तुर्किये तक जुड़े पाए गए। गुलाम जम्मू-कश्मीर के पूर्व प्रधानमंत्री की स्वीकारोक्ति भी पाकिस्तान की मंशा पर मुहर लगाती है।
हमले के दिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह आश्वस्त नहीं थीं कि यह एक आतंकी हमला है या नहीं, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ संदेह के बादल छंटते गए। आत्मघाती हमलावर डॉक्टर उमर के वीडियो ने विध्वंसक जिहादी मानसिकता की पुष्टि कर दी।
दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली में आतंकी हमले के कुछ समय बाद ही पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के एक न्यायिक परिसर में भी धमाका हुआ। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान से जुड़े संगठन ने ली। पाकिस्तान ने तुरंत आरोप लगाया कि भारत की शह पर यह हमला हुआ है। यह पाकिस्तान की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है, जिसका उद्देश्य दिल्ली हमले से ध्यान भटकाना और इस्लामाबाद धमाके को लेकर भारत को निशाना बनाना है। अफगानिस्तान में तालिबान के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच पाकिस्तान एक तीर से दो शिकार करने की फिराक में है, यह दर्शाने का प्रयास कर रहा है कि भारत उसके यहाँ अशांति फैला रहा है।
यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है कि जब भी पाकिस्तान को अमेरिका का समर्थन प्राप्त होता है, तो वहां से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। पूर्व अमेरिकी प्रशासन के दौरान पाकिस्तान के प्रति रवैये में आए बदलाव और पहलगाम आतंकी हमले जैसे उदाहरण इस ओर इशारा करते हैं। वर्तमान परिदृश्य में, सुरक्षा एजेंसियों को इस नई चुनौती के प्रति अत्यंत सावधान रहने और किसी भी ढील से बचने की आवश्यकता है।
दिल्ली: छात्र की आत्महत्या पर प्रिंसिपल और तीन शिक्षक निलंबित, FIR दर्ज
कनाडा में रह रहे दंपती को दिल्ली HC से बड़ी राहत, वर्चुअल पेशी को मिली मंजूरी
हाई कोर्ट ने BJP प्रवक्ता पर ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई रोकी, अगली सुनवाई 23 मार्च को
भारत-बांग्लादेश NSA की मुलाकात: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर
राज्यपालों व राष्ट्रपति के विधेयकों पर समयसीमा तय नहीं कर सकता सुप्रीम कोर्ट
पश्चिमी दिल्ली में युवक की गोली मारकर हत्या, तीन नाबालिग गिरफ्तार
प्रदूषण की सीमाएं नहीं, एयरशेड मॉडल से समाधान की जरूरत
ऑपरेशन साइबर हॉक: दिल्ली पुलिस ने 700 से अधिक साइबर अपराधियों को दबोचा, 1000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
