नोएडा में अवैध निर्माण का खेल: धमाके वाली जगह के पास बन रहे सैकड़ों आशियाने
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दूसरे चरण में छह गांवों की 1181 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होने के बावजूद, क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से अवैध निर्माण का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। यह विडंबना ही है कि जिस एयरपोर्ट के निरीक्षण के लिए नेता, शासन और प्राधिकरण के अधिकारी बार-बार आते हैं, उनकी नजर यहां धड़ल्ले से बन रहे तीन-चार मंजिला अवैध मकानों पर नहीं पड़ती।nnइसकी सबसे बड़ी वजह राजनीतिक संरक्षण और संबंधित प्राधिकरण की कथित मिलीभगत को माना जा रहा है। इन अवैध निर्माणों को रोकने या ध्वस्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन अवैध निर्माणों में ऐसे कॉलोनाइजर भी शामिल हैं जिन पर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। एयरपोर्ट की जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप में कुछ समय पहले 90 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।nnसूत्रों के अनुसार, एक ऐसे व्यक्ति जिसने बड़े पैमाने पर एयरपोर्ट की जमीन पर अवैध कब्जा किया है, उसे हाल ही में एयरपोर्ट का निरीक्षण करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी हेलीपेड पर मिलवा दिया गया था। इस मुद्दे के तूल पकड़ने और भाजपा हाईकमान तक बात पहुंचने के बाद, जिलाधिकारी ने जांच कर मुख्यमंत्री से मिलने वालों की सूची को अंतिम रूप देने वाले सिटी मजिस्ट्रेट को उनके पद से हटा दिया। हालांकि, सूची में नाम किसने शामिल किया, इसका पर्दाफाश अब तक नहीं हो सका है।nnइन छह गांवों में अधिकतर ग्रामीणों को जमीन अधिग्रहण का मुआवजा मिल चुका है, जिसका इस्तेमाल वे धड़ल्ले से अवैध निर्माण करने में कर रहे हैं। अवैध निर्माण के पीछे एक और बड़ा कारण यह है कि इन गांवों में निर्माण स्थलों के एवज में प्रशासन बाजार दर का दोगुना मुआवजा देता है और प्राधिकरण अधिकतम 500 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित करता है। दैनिक जागरण ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए अक्टूबर में जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया था और जेवर व रबूपुरा कोतवाली में 100 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।nnइसके बावजूद, अवैध निर्माण का धड़ल्ले से जारी रहना जिम्मेदारों पर गंभीर सवालिया निशान लगा रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए जेवर के गांव नगला हुकमसिंह, रन्हेरा, कुरैब व नगला जहानु का विस्थापन किया जाना है। विस्थापन के दौरान जिन लोगों के मकानों का विस्थापन होता है, उन्हें मकान की कीमत का दोगुना मुआवजा और विस्थापन टाउनशिप में अधिकतम 500 वर्ग मीटर का प्लॉट दिया जाता है।”
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