गाजियाबाद बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, AQI 422 पार
देश भर के 239 शहरों में वायु प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद पहले पायदान पर पहुँच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को गाजियाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 422 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इस सूची में 420 AQI के साथ ग्रेटर नोएडा दूसरे स्थान पर रहा। मंगलवार को भी गाजियाबाद देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर था।
प्रदूषण के इस स्तर ने शहरवासियों की सांसों पर संकट ला दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, शहर का कोई भी इलाका गंभीर वायु गुणवत्ता से अछूता नहीं है। विशेष रूप से संजय नगर में AQI 440 तक पहुँच गया, जो अत्यधिक चिंताजनक है। लोगों को जहरीली हवा में जीने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी रोकथाम के लिए विभिन्न उपाय करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
वर्ष 2023 में यह कम से कम आठ से दस बार देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा है, और अधिकांश दिनों में यह दूसरे या तीसरे स्थान पर बना रहता है। शहरवासियों को प्रदूषण से थोड़ी राहत तभी मिलती है जब हवा की गति तेज़ होती है या बारिश होती है।
प्रदूषण के मुख्य कारणों में सड़कों पर उड़ने वाली धूल और विभिन्न स्थानों पर कूड़े के ढेर में लगाई जाने वाली आग शामिल है। ट्रांस-हिंडन क्षेत्र के कई इलाकों में सड़कें टूटी-फूटी होने के कारण दिन भर धूल उड़ती रहती है। साथ ही, कूड़े को जलाने से निकलने वाला धुआँ वायुमंडल में मिलकर प्रदूषण के स्तर को और बढ़ा देता है।
क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी, अंकित सिंह के अनुसार, “सभी विभाग मिलकर अपना काम कर रहे हैं। मौसम में नमी के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। हवा न चलने के कारण धूल के कण वातावरण में तैरते रहते हैं।” हालांकि, उनके इस बयान से यह स्पष्ट नहीं होता कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम क्या उठाए जा रहे हैं।
CPCB और IQAir जैसे विभिन्न स्रोतों द्वारा जारी AQI के आंकड़ों में बड़े अंतर ने भी भ्रम की स्थिति पैदा की है। जहाँ CPCB के समीर ऐप ने गाजियाबाद का AQI 422 दर्ज किया, वहीं IQAir के अनुसार यह 231 था। इस विसंगति के बावजूद, यह स्पष्ट है कि गाजियाबाद की वायु गुणवत्ता बेहद खराब है और शहरवासियों को तत्काल स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।
